CBI Raid: ‘डिजिटल अरेस्ट’ सिंडिकेट के खिलाफ सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, 20 राज्यों में छापेमारी
89 ठिकानों पर छापेमारी में तीन को किया गिरफ्तार
Digital Arrest fraud: नई दिल्ली, (हि.स.)। डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने देशव्यापी कार्रवाई की है। एजेंसी ने तीन मामलों में अलग-अलग राज्यों से जुड़े संदिग्धों के ठिकानों पर समन्वित तलाशी अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
सीबीआई के अनुसार, जांच के दायरे में आए मामलों में पीड़ितों को लंबे समय तक डिजिटल अरेस्ट में रखने और पुलिस अधिकारी बनकर धन ऐंठने के आरोप हैं। इनमें बीआईटीएस पिलानी से जुड़ा मामला भी शामिल है, जिसमें कथित तौर पर 7.67 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। गुजरात के एक मामले में 19.24 करोड़ रुपये और कर्नाटक के मामले में 15.45 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप है।
बैंक खातों के जरिए रकम घुमाने का आरोप
जांच एजेंसी के मुताबिक, तलाशी और पूछताछ से आरोपियों की कथित भूमिका धोखाधड़ी की रकम हासिल करने, उसे कई खातों में स्थानांतरित करने और आगे भेजने में सामने आई है। सीबीआई का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य ठगी की रकम का पता लगाना, गिरोह के संचालकों और लाभार्थियों की पहचान करना तथा अहम साक्ष्यों को सुरक्षित करना था।
सीबीआई के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में हरियाणा निवासी आकाश, कोलकाता निवासी राजा करमाकर और ज्योति रानी शामिल हैं। एजेंसी ने बताया कि आकाश के खाते में कथित तौर पर 1.95 करोड़ रुपये आए थे, जबकि राजा करमाकर की फर्म के खाते में 1.5 करोड़ रुपये जमा हुए। ज्योति रानी के खाते में भी ठगी की रकम का एक हिस्सा पहुंचने और उसके कुछ भाग को नकद निकालने तथा बाकी रकम दूसरे खातों में भेजने का आरोप है। जांच एजेंसी का कहना है कि इन लेनदेन से आरोपियों की कथित भूमिका की जांच को महत्वपूर्ण दिशा मिली है। हालांकि, आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
डिजिटल डिवाइस और बैंक रिकॉर्ड जब्त
तलाशी के दौरान बैंकिंग दस्तावेज, खातों से जुड़े रिकॉर्ड, डिजिटल उपकरण और अन्य सामग्री जब्त की गई। सीबीआई इन साक्ष्यों की फोरेंसिक जांच कर रही है। एजेंसी का उद्देश्य कथित डिजिटल अरेस्ट नेटवर्क से जुड़े वित्तीय और तकनीकी संपर्कों का पता लगाना है।
सीबीआई ने बताया कि अभियान के दौरान मिले सुरागों के आधार पर नेटवर्क में शामिल अन्य संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। जांच का फोकस अलग-अलग राज्यों में फैले इस कथित साइबर अपराध तंत्र की पूरी संरचना को सामने लाने पर है।