Nepal Flood Alert: नेपाल पर मंडराया एक और खतरा, रसुवा में बनी नई झील फटने की आशंका से बढ़ी चिंता

बाढ़ की चेतावनी जारी, भोटेकोसी नदी का जलस्‍तर बढ़ा

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काठमांडू। नेपाल में हालिया भीषण बाढ़ के बाद एक बार फिर बड़े खतरे की आशंका जताई जा रही है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीआरआरएमए) ने रसुवा जिले में भोटेकोसी नदी का जलस्तर बढ़ने को लेकर नया अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि ल्हेंडे खोला नदी का प्रवाह रुकने से बनी झील का प्राकृतिक बांध टूट सकता है। ऐसा होने पर निचले इलाकों में अचानक तेज बाढ़ आने का खतरा है।

सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आई स्थिति

एनडीआरआरएमए के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, रसुवागढ़ी सीमा बिंदु से करीब 18 किलोमीटर ऊपर ल्हेंडे खोला नदी का पानी किसी अवरोध के कारण रुक गया है। इससे लगभग 0.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में पानी जमा होकर झील का रूप ले चुका है। अधिकारियों को आशंका है कि यदि इस झील को रोकने वाला प्राकृतिक अवरोध कमजोर हुआ या टूट गया, तो बड़ी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर बह सकता है। इससे भोटेकोसी और उससे जुड़े नदी क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो सकती है।

प्राधिकरण ने रसुवा के साथ नुवाकोट, धाडिंग और चितवन जिलों में भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। राहत, बचाव और खोज अभियान में जुटी टीमों के अलावा नदी किनारे रहने वाले नागरिकों से भी सावधानी बरतने को कहा गया है। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में पहले से ही लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर स्थानांतरित किया जा चुका है। यही वजह है कि फिलहाल तत्काल बड़े खतरे की स्थिति नहीं बताई गई है, लेकिन नदी के जलस्तर में बदलाव को देखते हुए निगरानी लगातार जारी है।

त्रिशूली नदी का जलस्तर भी बढ़ा

जल विज्ञान एवं मौसम विज्ञान विभाग के बाढ़ पूर्वानुमान प्रभाग के अनुसार, धाडिंग जिले के गल्छी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का जलस्तर सामान्य से करीब तीन मीटर ऊपर पहुंच गया है। यह इलाका भोटेकोसी नदी के निचले प्रवाह क्षेत्र में आता है। अधिकारियों का कहना है कि त्रिशूली में बढ़ते पानी के पीछे रसुवा के भोटेकोसी क्षेत्र से आया बाढ़ का पानी प्रमुख कारणों में शामिल है। इससे निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है।

पहले भी आ चुकी है विनाशकारी बाढ़

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 675 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,498 लोग लापता बताए गए हैं। लापता लोगों में 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। एनडीआरआरएमए का कहना है कि ल्हेंडे खोला में पानी का प्रवाह बाधित होने के अलावा आसपास के क्षेत्र में कुछ और छोटी-बड़ी झीलें बनने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में प्रशासन नदी के निचले इलाकों पर विशेष नजर बनाए हुए है।

प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे नदी के किनारे जाने से बचें और स्थानीय प्रशासन तथा आपदा प्रबंधन एजेंसियों की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें। विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक बांध से बनी झील के अचानक टूटने पर बाढ़ बहुत तेजी से नीचे की ओर पहुंच सकती है, इसलिए समय रहते सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।

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