शिक्षा और रोजगार
उर्दू भाषा तहज़ीबी रवायतों, अदबी विरासत, साझा संस्कृति और आपसी भाईचारे की आईनादार: अंसार सिद्दीकी
उर्दू भाषा तहज़ीबी रवायतों, अदबी विरासत, साझा संस्कृति और आपसी भाईचारे की आईनादार: अंसार सिद्दीकी
कैराना (सच कहूँ न्यूज़)। Kairana News: कस्बे के तीतरवाड़ा मार्ग पर चेयरमैन शमशाद अंसारी के बेटे उमर शमशाद के कार्यालय में एक शानदार शेरी निशस्त का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता मशहूर शायर हाजी अकबर अंसारी ने की, जबकि संचालन प्रसिद्ध शायर एवं पत्रकार अंसार सिद्दीकी ने किया। शेरी निशस्त का उद्घाटन चेयरमैन शमशाद अंसारी और शाहिद मेंबर ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। महफिल का आगाज़ मुज़म्मिल अंसारी ने नात-ए-पाक पेश करके किया। इसके बाद शायरों ने अपना चुनिंदा कलाम पेश किया, जिसे सुनकर मौजूद लोगों ने खूब दाद और वाहवाही दी।
इस मौके पर शायर एवं पत्रकार अंसार सिद्दीकी ने उर्दू भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार के विषय पर विस्तार से अपने विचार रखते हुए कहा कि उर्दू महज एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी तहज़ीबी रवायतों, अदबी विरासत, साझा संस्कृति और आपसी भाईचारे की आईनादार है। इस भाषा ने विभिन्न तहज़ीबों और संस्कृतियों को एक-दूसरे के करीब लाने में अहम भूमिका निभाई है। उर्दू की मिठास, शाइस्तगी, अभिव्यक्ति की व्यापकता और अदबी नज़ाकत इसे दूसरी भाषाओं में एक अलग पहचान दिलाती है। उन्होंने कहा कि उर्दू भाषा के विकास और प्रचार-प्रसार के लिए नई पीढ़ी को उर्दू पढ़ने, लिखने और बोलने की ओर आकर्षित करना बेहद जरूरी है। घरों, शिक्षण संस्थानों, अदबी अंजुमनों और सामाजिक संगठनों में उर्दू को बढ़ावा देने के लिए गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए। अंसार सिद्दीकी ने कहा कि मुशायरे और शेरी निशस्त उर्दू भाषा और साहित्य के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके माध्यम से न सिर्फ लोगों की दिलचस्पी शेरो-अदब में बढ़ती है, बल्कि नए शायरों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी मिलता है।
उन्होंने आगे कहा कि उर्दू साहित्य के संरक्षण और विकास के लिए लेखकों, पत्रकारों, शिक्षकों और अदब से मोहब्बत रखने वाली हस्तियों को मिलकर काम करना होगा, ताकि उर्दू की इल्मी, अदबी और तहज़ीबी विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाया जा सके। शेरी निशस्त में बाहरी शायरों में शादाब सहर, अफ़रोज़ अहमद, हाशिम हैदर और जुनैद अहमद के नाम प्रमुख रहे। वहीं, स्थानीय शायरों में कारी मोहम्मद इरफान ज़िया, हाफिज मोहम्मद उस्मान, मास्टर अतीक और उमर अंसारी समेत अन्य शायरों ने अपना कलाम पेश किया। महफिल में मौजूद शायरों और अदबनवाज़ लोगों ने उर्दू भाषा और साहित्य से अपनी गहरी वाबस्तगी का इज़हार किया। शेरी निशस्त ने जहां प्रतिभागियों को शेरो-सुखन से लुत्फ़अंदोज़ होने का मौका दिया, वहीं उर्दू भाषा की अहमियत और उसके प्रचार-प्रसार की जरूरत पर भी गौर करने का अवसर प्रदान किया।