UP Railway News: यूपी वालों के लिए खुशखबरी, इन जिलों और गांवों से होकर गुजरेगी नई रेलवे लाइन, भूमि का होगा अधिग्रहण, रेलवे ने जारी की सूचि

यूपी वालों के लिए खुशखबरी, इन जिलों और गांवों से होकर गुजरेगी नई रेलवे लाइन, भूमि का होगा अधिग्रहण, रेलवे ने जारी की सूचि

Published On

नई दिल्ली/शामली। UP Railway News: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रोजाना रेल यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। दिल्ली-शामली रेल लाइन के दोहरीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। रेलवे बोर्ड ने दिल्ली-शाहदरा से शामली तक करीब 87.45 किलोमीटर लंबे रेलखंड के दोहरीकरण को मंजूरी दी है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद ट्रेनों की आवाजाही की क्षमता बढ़ने और परिचालन में सुधार होने की उम्मीद है। फिलहाल इस रेलमार्ग पर सिंगल लाइन होने के कारण एक ट्रेन को दूसरी ट्रेन के गुजरने के लिए कई बार स्टेशन या क्रॉसिंग प्वाइंट पर इंतजार करना पड़ता है। दोहरीकरण के बाद दोनों दिशाओं में ट्रेनों के संचालन के लिए अलग-अलग ट्रैक उपलब्ध हो सकेंगे।

87.45 किलोमीटर रेल लाइन का होगा दोहरीकरण

दिल्ली-शाहदरा से शामली तक करीब 87.45 किलोमीटर रेलखंड को डबल लाइन में बदलने की योजना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, रेलवे बोर्ड ने 29 अक्टूबर 2025 को इस परियोजना को मंजूरी दी थी। इसके बाद 20 फरवरी 2026 को निर्माण एजेंसी को काम करने की स्वीकृति दी गई।
परियोजना के तहत अंतिम सर्वे और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (ऊढफ) तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। हालांकि, सितंबर 2026 की उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, ऊढफ का काम अभी पूरा नहीं हुआ था। ऐसे में परियोजना के निर्माण कार्य की शुरूआत और पूरा होने की समयसीमा को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

दोहरीकरण के सर्वे में शामिल हैं 24 स्टेशन और हॉल्ट

शाहदरा से शामली तक रेल लाइन के दोहरीकरण से संबंधित सर्वे में 24 रेलवे स्टेशन और हॉल्ट शामिल किए गए हैं। इनमें शाहदरा ब्लॉक केबिन, बेहटा हाजीपुर, लोनी, खेकड़ा, बागपत रोड, बड़ौत, कांधला और शामली समेत अन्य स्टेशन शामिल हैं।

जनवरी 2026 में इस रेलखंड के दोहरीकरण के सर्वे का काम पूरा होने की जानकारी सामने आई थी। अब परियोजना की अगली प्रक्रिया में ऊढफ और निर्माण से संबंधित औपचारिकताएं महत्वपूर्ण होंगी।

सिंगल लाइन की वजह से ट्रेनों को करना पड़ता है इंतजार

दिल्ली-शामली रेलमार्ग पर फिलहाल एक ही लाइन होने के कारण ट्रेनों के संचालन में क्रॉसिंग की समस्या आती है। जब विपरीत दिशा से दूसरी ट्रेन गुजरती है, तो कई बार पहली ट्रेन को स्टेशन या निर्धारित स्थान पर रुकना पड़ता है। दोहरीकरण के बाद दोनों दिशाओं में अलग-अलग ट्रैक उपलब्ध होने से इस तरह की प्रतीक्षा कम करने में मदद मिल सकती है। इससे ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होने और भविष्य में रेल सेवाओं की संख्या बढ़ाने की संभावनाएं भी बेहतर हो सकती हैं।

बागपत, बड़ौत और शामली के यात्रियों को होगा फायदा

दिल्ली-शामली रेलमार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों को राजधानी दिल्ली से जोड़ता है। इस लाइन पर बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग, विद्यार्थी, व्यापारी और अन्य यात्री सफर करते हैं। रेल लाइन का दोहरीकरण होने से बागपत, बड़ौत, शामली और आसपास के इलाकों से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। परिचालन में सुधार होने से रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के समय की बचत हो सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ परियोजना पूरी होने और ट्रेनों के संचालन में बदलाव के बाद ही स्पष्ट होगा।

नवंबर 2025 में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बड़ौत में दिल्ली-शामली रेलखंड के लिए नई डबल लाइन की घोषणा की थी। इसी कार्यक्रम में दिल्ली-शामली मार्ग पर दो नई टएटव रेल सेवाएं भी शुरू की गई थीं।

शामली से सहारनपुर तक अलग चरण में आगे बढ़ेगी प्रक्रिया

करीब 175 किलोमीटर लंबे दिल्ली-सहारनपुर रेलमार्ग के पूरे दोहरीकरण को लेकर अलग-अलग हिस्सों की स्थिति समझना जरूरी है। फिलहाल शाहदरा से शामली तक के करीब 87.45 किलोमीटर हिस्से पर दोहरीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। वहीं, शामली से टपरी-सहारनपुर बाईपास तक के हिस्से के दोहरीकरण के लिए अलग सर्वे और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया बताई गई है। इसलिए पूरे दिल्ली-सहारनपुर रेलमार्ग के दोहरीकरण को पूरा हुआ मानना अभी सही नहीं होगा।

दिल्ली-शामली रेल लाइन दोहरीकरण: प्रमुख बातें

कुल दिल्ली-सहारनपुर रेलमार्ग: करीब 175 किलोमीटर।

पहले चरण का रेलखंड: शाहदरा से शामली तक 87.45 किलोमीटर।

रेलवे बोर्ड की मंजूरी: 29 अक्टूबर 2025।

निर्माण एजेंसी को स्वीकृति: 20 फरवरी 2026।

सर्वे में शामिल: 24 स्टेशन और हॉल्ट।

वर्तमान स्थिति: उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऊढफ तैयार करने की प्रक्रिया जारी थी।

अगला हिस्सा: शामली से टपरी-सहारनपुर बाईपास तक दोहरीकरण के लिए अलग प्रक्रिया।

परियोजना पूरी होने के बाद दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच रेल संपर्क को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। अब यात्रियों की नजर ऊढफ के पूरा होने, निर्माण कार्य शुरू होने और परियोजना की समयसीमा से जुड़ी आधिकारिक घोषणाओं पर रहेगी।

 

About The Author

Related Posts