शिक्षा और रोजगार
कोरोना : फर्जी जानकारियां देने वालों के खिलाफ कार्रवाई का ‘सुप्रीम निर्देश’
Supreme Court | दिशानिर्देश जारी करने संबंधी याचिका की सुनवाई सात अप्रैल तक स्थगित
नयी दिल्ली। Supreme Court ने देश में कोरोना वायरस से संबंधित फर्जी खबरें देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का जहां सरकार को मंगलवार को निर्देश दिया, वहीं केंद्र ने सरकारी तंत्र से तथ्यों की पुष्टि किये बिना ‘कोविड-19’ से संबंधित कोई भी रिपोर्ट प्रकाशित या प्रसारित करने से रोक के निर्देश का अनुरोध किया। मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की विशेष पीठ ने राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के कारण प्रवासी श्रमिकों के समक्ष उत्पन्न परिस्थितयों के निवारण के लिए दिशानिर्देश जारी करने संबंधी याचिका की सुनवाई आगामी सात अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी, लेकिन इस बीच कई दिशानिर्देश भी जारी किये।
खंडपीठ ने अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव एवं रश्मि बंसल की याचिकाओं की वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये संयुक्त सुनवाई के दौरान न केवल केंद्र सरकार द्वारा ऑनलाइन प्रेषित स्थिति रिपोर्ट का विस्तृत अध्ययन किया, बल्कि सॉलिसिटर जनरल की ओर से रखे गये पक्षों को भी गम्भीरता से सुना। केंद्र सरकार ने 39 पन्नों की स्थिति रिपोर्ट के 56वें पैरा में मीडिया में कोरोना से संबंधित अपुष्ट खबरों के प्रकाशन एवं प्रसारण पर रोक लगाने के लिए न्यायालय से अनुरोध किया है। केंद्र ने कहा है कि शीर्ष अदालत को यह निर्देश जारी करना चाहिए कि कोई भी मीडिया संगठन कोरोना से जुड़ी खबरों की संबंधित अधिकारों से पुष्टि किये बिना न तो प्रिंट मीडिया में प्रकाशित करे, न ही चैनलों पर या वेबसाइटों पर प्रसारित करे। स्थित रिपोर्ट में कहा गया है कि अपुष्ट खबरों के प्रकाशन एवं प्रसारण से बेवजह लोगों में अफरातफरी मचेगी।
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