महिला पत्रकार का पुलिसकर्मियों के दुर्व्यवहार के खिलाफ आमरण अनशन तीसरे दिन भी जारी रहा 

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गाजियाबाद (सच कहूँ /रविंद्र सिंह)। गाजियाबाद कमिश्नरेट के थाना मधुबन बापूधाम में तैनात पुलिसकर्मियों पर दुर्व्यवहार, उत्पीड़न और धमकी के आरोप लगाते हुए वरिष्ठ महिला पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने डीएम कार्यालय के बाहर तीसरे दिन भी आमरण अनशन जारी रखा। उन्होंने कहा है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता और उनकी चार प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, वे अपना शांतिपूर्ण धरना और अनशन जारी रखेंगी, भले ही इसके लिए उन्हें अपने प्राणों की आहुति क्यों न देनी पड़े।

कमिश्नर के आदेशों की उड़ाई धज्जियां, थाने में अभद्रता का आरोप

वरिष्ठ महिला पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने आरोप लगाया कि 27 जून 2025 को अपनी गाड़ी से जुड़ी एक दुर्घटना की शिकायत दर्ज कराने वह थाना मधुबन बापूधाम गई थीं, जहां थाना प्रभारी और पुलिसकर्मियों ने शालीनता और संवेदनशीलता की जगह तानाशाही रवैया अपनाया। उन्होंने बताया कि एक दबंग व्यक्ति ने थाने में ही उनकी लज्जा भंग करने का प्रयास किया और उन्हें जान से मारने की धमकी दी, लेकिन वहां मौजूद पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने रहे। इसके उलट, अपूर्वा के अनुसार, पुलिस ने न केवल शिकायत दर्ज करने से इनकार किया, बल्कि उन्हें कार्यालय से बाहर निकाल दिया गया और सोशल मीडिया से पोस्ट हटाने का दबाव बनाया गया। पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड़ द्वारा थानों में आगंतुकों से “जी” और “आप” कहकर बात करने के आदेश भी इस घटना में स्पष्ट रूप से अनदेखी की गई।

पीड़ित महिला पत्रकार ने जिला प्रशासन और पुलिस के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखीं

 दुर्व्यवहार और अभद्रता करने वाले पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाए।उनके और उनके पति ललित चौधरी (प्रकाशक-संपादक) के साथ दुर्व्यवहार करने वाले थाना प्रभारी को तत्काल पद से हटाया जाए।घटना की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए।जनता और पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार रोकने के लिए ठोस नीति और निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।

न्याय की मांग, प्रशासन से कार्रवाई की अपील

महिला पत्रकार ने कहा कि उन्होंने 28 जून को पुलिस आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपी, जिसमें त्वरित कार्रवाई का आश्वासन तो दिया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि यह केवल उनकी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक और पत्रकार की आवाज़ है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

समर्थन में उठ रही हैं आवाजें, पुलिस-जन संबंधों पर उठे सवाल

इस घटनाक्रम ने गाजियाबाद में पुलिस और नागरिकों के रिश्तों पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। कुछ संगठनों व आम नागरिकों ने महिला पत्रकार के समर्थन में आवाज उठाई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।इस तरह की घटनाएं पुलिस की कार्यप्रणाली और लोकतंत्र में नागरिक अधिकारों की सुरक्षा पर सीधा हमला मानी जा रही हैं। अनशन स्थल पर मौजूद महिला पत्रकार अपूर्वा चौधरी का स्पष्ट कहना है,”मैं शांतिपूर्ण तरीके से न्याय के लिए बैठी हूं, और जब तक मेरी मांगें पूरी नहीं होतीं, मैं पीछे नहीं हटूंगी।”

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