चीनी हिरासत में चली गई थी डोभाल की इंटेलिजेंस टीम, लगा था करियर खत्म हो जाएगा; बुजुर्ग शेरपा की एक बात ने बदल दी सोच
चीनी हिरासत में चली गई थी डोभाल की इंटेलिजेंस टीम, लगा था करियर खत्म हो जाएगा; बुजुर्ग शेरपा की एक बात ने बदल दी सोच
रुड़की। Roorkee News: राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में अपने शुरुआती करियर से जुड़ा एक ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने उन्हें न सिर्फ चिंता में डाल दिया था, बल्कि एक समय उन्हें अपना करियर खत्म होता हुआ भी नजर आया था। डोभाल ने बताया कि युवा IPS अधिकारी के तौर पर जब वह सिक्किम में इंटेलिजेंस की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, तब उनकी ड्यूटी सीमा क्षेत्रों पर नजर रखने और चीनी सेना यानी PLA की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जुटाने की भी थी।
डोभाल के मुताबिक, उस समय वह इंटेलिजेंस के काम में नए थे और उम्र भी काफी कम थी। सिक्किम में उनकी जिम्मेदारियों में सीमा से जुड़े इलाकों की निगरानी, PLA की गतिविधियों को समझना और चीन से संबंधित जरूरी सूचनाएं जुटाना शामिल था।
इंटेलिजेंस मिशन पर गई टीम नहीं लौटी
डोभाल ने बताया कि एक बार उनकी टीम को सीमा क्षेत्र में एक इंटेलिजेंस मिशन पर भेजा गया। योजना के मुताबिक टीम को करीब पांच या छह दिन बाद वापस लौटना था। लेकिन निर्धारित समय बीतने के बावजूद टीम वापस नहीं आई।
उन्होंने बताया कि पहले पांच दिन बीते और फिर दस दिन भी गुजर गए। टीम के वापस नहीं लौटने से उनकी चिंता बढ़ती गई। उन्हें मिशन पर गए लोगों की सुरक्षा की भी चिंता थी और एक अधिकारी के तौर पर मिशन की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर थी।
कुछ समय बाद उन्हें मुख्यालय से फोन आया। उनके वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मिशन पर गई टीम चीनी हिरासत में है। डोभाल के अनुसार, बाद में बातचीत और अन्य प्रयासों के जरिए टीम के सदस्यों की वापसी संभव हो सकी।
लगा था कि अब करियर खत्म हो जाएगा
NSA ने बताया कि इस घटना के बाद उन्हें लगा कि उनका करियर खत्म हो जाएगा। मामले की जांच भी हुई, लेकिन जांच में उनकी कोई गलती नहीं पाई गई।
डोभाल ने कहा कि संभव है कि उन्होंने अपनी तरफ से सभी जरूरी कदम सही तरीके से उठाए थे, लेकिन इसके बावजूद यह घटना उनके लिए बेहद कठिन अनुभव थी। एक तरफ मिशन की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी और दूसरी तरफ उन लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता थी, जिन्हें उन्होंने मिशन पर भेजा था।
बुजुर्ग तिब्बती शेरपा ने बताई जिंदगी की बड़ी सीख
डोभाल ने बताया कि उस समय उनके साथ इंटेलिजेंस ब्यूरो में काम करने वाला एक बुजुर्ग तिब्बती शेरपा भी था। इस घटना के दौरान उस शेरपा ने उनसे जिंदगी को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही। उसने समझाया कि यह सब 'मैप रीडिंग' का मामला है। जिंदगी में कुछ लोग अपना नक्शा सही पढ़ लेते हैं, जबकि कुछ लोग गलत दिशा पकड़ लेते हैं।
डोभाल के अनुसार, शेरपा की यह छोटी-सी बात उनके लिए जिंदगी और करियर की बड़ी सीख बन गई। उन्होंने इस अनुभव के जरिए बताया कि जीवन में परिस्थितियां हमेशा हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं, लेकिन सही दिशा पहचानना और उपलब्ध परिस्थितियों को समझकर आगे बढ़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिंदगी में हर व्यक्ति को अलग-अलग परिस्थितियों और रास्तों के बीच फैसले लेने पड़ते हैं। ऐसे में सही दिशा पहचानने की क्षमता ही व्यक्ति को आगे बढ़ने में मदद करती है।