Global Reserve Currency: डॉलर के मुक़ाबले चीनी युआन का बढ़ता प्रभाव, अमेरिका चिंतित

अमेरिकी डॉलर को वैश्विक रिजर्व मुद्रा बनाए रखने पर जोर

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संयुक्त राष्ट्र। अमेरिका में दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के सीनेटरों ने अमेरिकी डॉलर की वैश्विक स्थिति को मजबूत बनाए रखने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दोबारा पेश किया है। इस प्रस्ताव में चीन की उन रणनीतियों को लेकर चिंता व्यक्त की गई है, जिनके माध्यम से वह चीनी युआन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावशाली मुद्रा बनाने का प्रयास कर रहा है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि यदि चीन समानांतर वैश्विक वित्तीय ढांचा खड़ा करने में सफल होता है, तो इससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की आर्थिक तथा रणनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। Global Reserve Currency

रिपब्लिकन सीनेटर टेड बड और डेमोक्रेटिक सीनेटर जीन शाहीन द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिकी डॉलर का वैश्विक रिजर्व मुद्रा के रूप में बने रहना अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय स्थिरता के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि चीन वर्षों से अपने आर्थिक प्रभाव का विस्तार करने और वैश्विक भुगतान प्रणालियों में अपनी भूमिका बढ़ाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। सीनेटरों के अनुसार, यदि चीन को वैकल्पिक वैश्विक वित्तीय प्रणाली तैयार करने की खुली छूट मिलती है, तो इससे दुनिया की अर्थव्यवस्था दो हिस्सों में बंट सकती है। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति मुक्त व्यापार व्यवस्था और विकासशील देशों की आर्थिक प्रगति के लिए चुनौती बन सकती है।

प्रस्ताव में इस बात पर भी बल दिया गया कि अमेरिकी डॉलर ने लंबे समय से वैश्विक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि बीते वर्षों में वैश्विक मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अब भी डॉलर सबसे प्रभावशाली मुद्रा बना हुआ है, लेकिन चीन लगातार युआन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए नए वित्तीय तंत्र विकसित कर रहा है।

अमेरिकी सांसदों ने चीन की बेल्ट एंड रोड परियोजना और क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि इन पहलों के माध्यम से बीजिंग विकासशील देशों में अपना आर्थिक प्रभाव बढ़ा रहा है और वैश्विक भुगतान व्यवस्था में पश्चिमी देशों की पकड़ को चुनौती देने की कोशिश कर रहा है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र या ताइवान से जुड़े किसी संभावित संकट की स्थिति में चीन की वैकल्पिक वित्तीय प्रणाली पश्चिमी देशों के प्रभाव को कमजोर कर सकती है। इसलिए अमेरिका को अपने सहयोगी देशों के साथ आर्थिक साझेदारी मजबूत करने और विकासशील देशों में निवेश तथा सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। Global Reserve Currency

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