कारों की कीमतों में इजाफा कर सकती है मारुति सुजुकी

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नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। देश की सबसे बड़ी कार विनिमार्ता मारुति सुजुकी विभिन्न मॉडलों की कीमतों में बढ़ोत्तरी करने की योजना बना रही है, क्योंकि कच्चे माल सामग्री के दाम बढ़ने के कारण कंपनी के मुनाफे पर असर पड़ा है। बीते एक वर्ष में मारुति सुजुकी ने कारों के दाम चार बार बढ़ाते हुए कुल 8.8 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है। मारुति सुजुकी इंडिया के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक शशांक श्रीवास्तव ने कहा कि कंपनी को कच्चे माल की कीमतों में नरमी की उम्मीद थी, लेकिन वे ऊंचे बने हुए हैं। न्होंने कहा कि पिछले एक साल में स्टील, एल्युमीनियम, तांबा और कीमती धातुओं की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है, जिससे कार की कीमतों में बढ़ोत्तरी की जरूरत पड़ी है।

कार के दामों की ओर बढ़ोत्तरी की इशारा करते हुए श्रीवास्तव ने कहा,” स्टील के दाम 38 रुपए प्रति किलो से बढ़कर 75-77 रुपए प्रति किलो हो गया है। हाल ही में इसमें और मजबूती आई है। कीमती धातुओं के दाम भी बढ़ गए हैं। रोडियम जो कभी 16,000 रुपए प्रति ग्राम होता है, यह बढ़कर 65,000 रुपए प्रति ग्राम हो गया है। तांबे के दाम 5200 डालर प्रति टन से बढ़कर अब 10,400 डालर प्रति टन हो गए हैं।” हालांकि एसयूवी वर्ग की श्रेणी में बढ़ती मांग को देखते हुए मारूति सुजुकी ने अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में इसे मजबूत करने का फैसला किया है।

हम एसयूवी वर्ग में कमजोर है

श्रीवास्तव ने कहा अगर आप एसयूवी को बाहर रखें तो बाजार में हमारी हिस्सेदारी 66 प्रतिशत है, लेकिन अगर आप इसे जोड़ते है तो हमारी हिस्सेदारी घटकर 45 प्रतिशत हो जाती है। इसका मतलब है कि हम एसयूवी वर्ग में कमजोर है जिसमें सुधार करने की आवश्यकता है। हम अपने उत्पाद पोर्टफोलियो में सुधार करते हुए एसयूवी वर्ग में आगे बढ़ेगें।” उन्होंने कहा,”इसके आगे इस समय हम कुछ नहीं कह सकते हैं, लेकिन एक बात मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि हम अपने एसयूवी पोर्टफोलियो को मजबूत करने जा रहे हैं।”

मारुति के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि कंपनी भारतीय कार बाजार को लेकर उत्साहित है। निर्यात बाजार में प्रवृत्ति पर श्रीवास्तव ने कहा कि मारुति सुजुकी ने वित्त वर्ष 2021-22 में विभिन्न देशों में अब तक के रिकॉर्ड 2,38,400 वाहनों का निर्यात किया है। मारुति सुजुकी के लिए मुख्य निर्यात बाजारों में दक्षिण अफ्रीका, चिले, मिश्र, फिलीपींस और कोलंबिया है। इन पांचों देशों में वित्त वर्ष 2021-22 में गाड़ियों की मांगों में इजाफा हुआ है।

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