पूजनीय सतगुरु जी अचानक तेरावास से बाहर निकलते ही ऊंची आवाज में बोले, ‘बच्चा डिग्गी में गिर गया, उसे बाहर निकालो…
प्रेमी मान सिंह इन्सां पु...
14 दिन बाद चंद्रमा पर छा जाएगा अंधेरा, जानिए विक्रम लैंडर और रोवर प्रज्ञान का फिर क्या होगा
Chandrayaan-3 Successful ...
आचार्य चाणक्य ने कहा
मनुष्य से अधिक कठोर कोई नहीं है, परिस्थितियाँ मनुष्य को अपने अनुकूल बना लिया करती हैं।
शासन और स्वाद
शांतिपूर्ण और सुखद वातावरण में हमारा मन शांत रहता है, तब हमें स्वादहीन चीजें भी स्वादिष्ट मालूम पड़ने लगती हैं। लेकिन जब चारों ओर त्राहि,त्राहि मची हो, तब मन अशांत रहता है और स्वादिष्ट चीजों का स्वाद भी पता नहीं चलता।'


























