नाइट कर्फ्यू के साथ प्रवासियों का पलायन शुरू

Migrants

चिंताजनक। कोरोना की रफ्तार से एक बार फिर मुश्किलें बढ़ने की आशंका (Migrants Begin Migrating)

सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम। कोरोना महामारी के खतरनाक रूप लेने पर हरियाणा में लगाए गए नाइट कर्फ्यू के साथ ही यूपी, बिहार व अन्य राज्यों के लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया है। उन्हें डर इस बात का सता रहा है कि नाइट कर्फ्यू के बाद अब लॉकडाउन लगेगा। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से ऐसे कोई संकेत नहीं दिए गए हैं। हाँ, कुछ सख्ती जरूर बरती जा रही है, जिससे कि लोग मास्क, सोशल डिस्टेंस समेत तमाम ऐहतियात बरतें। वर्ष 2020 में लॉकडाउन के साथ ही अपने राज्यों को पैदल ही निकले मजदूरों ने वर्ष 2021 में लॉकडाउन के डर से अभी से अपने घर जाना शुरू कर दिया है।

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लॉकडाउन के डर से घरों को लौटने यूपी, बिहार के लोग

गुरुग्राम में राजीव चौक व अन्य स्थानों से निजी बस संचालकों द्वारा उन्हें ले जाया जा रहा है। गुरुग्राम में यूपी, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड समेत अन्य कई राज्यों से लेबर किसी न किसी कंपनी, निर्माण कार्य, होटलों व अन्य कई क्षेत्रों में मेहनत, मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं। सबसे अधिक लेबर यहां निर्माण कार्यों में है। क्योंकि गुरुग्राम में हर बड़ी कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रोजेक्ट चल रहे हैं।

  • उनके मुख्यालय भी यहां पर हैं।
  • गुरुग्राम शहर के 20 किलोमीटर से अधिक दायरे में मकान, फ्लैट बनाने का कार्य जोरों पर है।
  • कोरोना की वजह से काफी प्रोजेक्ट बंद थे, जो कि साल 2020 के अंत में शुरू हुए।

लोगों के माथे पर कोरोना के फैलाव ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं

अभी इन कार्यों में तेजी ही आई थी कि एकाएक कोरोना महामारी ने फिर से पैर पसारने शुरू कर दिए हैं। गुरुग्राम में दहाई तक कोरोना के केस पहुंच गए थे, जो कि अब बढ़कर सैंकड़ों ओर सैंकड़ा से हजार को पार कर गए हैं। इन केसों ने सरकार की भी चिंता बढ़ाई है। ( Migrants Begin Migrating) राजधानी के साथ सटे होने के कारण गुरुग्राम देश ही नहीं, दुनिया का महत्वपूर्ण शहर है। यहां दुनिया की बड़ी कंपनियों के मुख्यालय है। मतलब एक तरह से इस शहर में हर हाथ को काम, हर पेट को रोटी मिलने का जुगाड़ है।

  • इसी आस के साथ लोग यहां अपने घरों को छोड़कर आते हैं कि मेहनत करके अच्छा गुजारा हो जाएगा।
  • अब ऐसे लोगों के माथे पर कोरोना के फैलाव ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं।
  • वे न चाहकर भी यहां से पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।

…वे अभी से अपने घर जाकर अपने बच्चों को सुरक्षित कर देना चाहते हैं

यहां राजीव चौक पर बसों में सवार होकर बिहार जा रहे राकेश पासवान, सुदेश महतो, राकेश सिन्हा, विमलेश पांडेय, मुकेश चौधरी आदि ने बिहार सरकार ने पहले भी कोई मदद नहीं की और आगे भी कोई मदद की उम्मीद नहीं है। ऐसे में वे किस के भरोस रहें। इसलिए वे अभी से अपने घर जाकर अपने बच्चों को सुरक्षित कर देना चाहते हैं। पहले पैदल चलकर गए थे, बच्चों, महिलाओं, दिव्यांगों, बीमारों को बहुत परेशानी हुई थी। ऐसी परेशानी फिर से नहीं झेलना चाहते। उन्हें बताया भी गया कि अभी तो हरियाणा में नाइट कर्फ्यू लगा है, लॉकडाउन नहीं।

  • इस पर उनका जवाब था कि इतना हो गया तो आगे लॉकडाउन भी लगेगा।
  • इसलिए वे इंतजार नहीं करना चाहते।
  • अपने घर जाना चाहते हैं।
  • उनका यह भी कहना है कि पहले तो लोगों ने खिला दिया था, अब सबकी स्थिति कमजोर है।
  • भूखे मरने से अच्छा है पहले ही अपने घर पहुंच जाएं।

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