Body Donation: सचखंडवासी 83 वर्षीय शीलावंती इन्सां बनीं इंसानियत की अनूठी मिसाल
अंतिम इच्छा पूरी कर नेत्रदान के साथ किया पार्थिव शरीर दान
Body Donation: भूना (सच कहूँ/संगीता रानी)। मानवता भलाई कार्यों में अग्रणी रहने वाले डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी एक बार फिर सेवा और परोपकार की मिसाल बने हैं। भूना निवासी 83 वर्षीय सचखंडवासी शीलावंती इन्सां धर्मपत्नी मनोहर लाल रेवाड़ी ने मृत्यु के बाद भी इंसानियत की सेवा का संदेश देकर समाज के सामने प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। परिवारजनों ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए नेत्रदान के साथ-साथ पार्थिव शरीर मेडिकल रिसर्च के लिए दान कर दिया। Fatehabad News
जानकारी के अनुसार शीलावंती इन्सां गत दिवस अल सुबह अपनी सांसों रूपी पूंजी पूर्ण कर सचखंडवासी हो गई थीं। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की शिक्षाओं से प्रेरित होकर उन्होंने जीते जी मरणोपरांत शरीरदान का संकल्प लिया था। उनके पुत्र नरेंद्र कुमार और बिट्टू रेवाड़ी इन्सां ने मां की इच्छा को पूरा करते हुए उनके नेत्रदान के साथ पार्थिव देह उत्तर प्रदेश के महाराजगंज स्थित केएमसी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को मेडिकल रिसर्च और विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु दान कर दी। इस दौरान परिजनों, रिश्तेदारों और साध-संगत ने सचखंडवासी शीलावंती इन्सां को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
फूलों से सजी एंबुलेंस में पार्थिव देह को किया रवाना
माहौल ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, शीलावंती इन्सां तेरा नाम रहेगा’ तथा ‘शरीरदान-महादान’ जैसे नारों से गूंज उठा। बाद में फूलों से सजी एंबुलेंस में पार्थिव देह को मेडिकल कॉलेज के लिए रवाना किया गया। उपस्थित साध-संगत ने कहा कि किसी जरूरतमंद को नई रोशनी देना और मेडिकल शिक्षा के लिए शरीरदान करना सबसे बड़ा परोपकार है। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी रक्तदान, नेत्रदान, पर्यावरण संरक्षण और जरूरतमंदों की सहायता जैसे मानवता भलाई कार्यों में निरंतर सेवा दे रहे हैं।
परिजनों ने बताया कि शीलावंती इन्सां हमेशा मानवता की सेवा को सर्वोच्च मानती थीं और उनकी यही सोच आज समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। उनके इस निर्णय से जहां जरूरतमंदों को नई जिंदगी की उम्मीद मिलेगी, वहीं मेडिकल छात्रों को अध्ययन और रिसर्च में भी सहायता प्राप्त होगी।समाजसेवियों ने कहा कि यदि अधिक लोग नेत्रदान और शरीरदान के लिए आगे आएं तो अनेक जरूरतमंदों की जिंदगी रोशन हो सकती है और चिकित्सा विज्ञान को भी नई दिशा मिल सकती है। Fatehabad News