रक्षा क्षेत्र में मिली बड़ी कामयाबी। डीआरडीओ ने हारपरसोनिक हारपरसोनिक टेक्नोलोजी का किया सफल परीक्षण

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों को दी बधाई

नई दिल्ली। देश ने हारपरसोनिक और क्रूज मिसाइल प्रक्षेपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए हारपरसोनिक टेक्नोलोजी डिमोन्स्ट्रेशन व्हीकल (एचटीडीवी) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। देश के प्रमुख अनुसंधान संगठन, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने देश में ही विकसित प्रौद्योगिकी के माध्यम से सोमवार सुबह 11 बज कर तीन मिनट पर ओड़िशा के तट पर व्हीलर द्वीप स्थित डा ए पी जे अब्दुल कलाम प्रक्षेपण परिसर से यह परीक्षण किया। इसके साथ ही देश अमेरिका, रूस और चीन जैसे चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास यह प्रौद्योगिकी है। यह हवा में आवाज की गति से छह गुना ज्यादा स्पीड से दूरी तय करता है।

यानी दुश्मन देश के एयर डिफेंस सिस्?टम को इसकी भनक तक नहीं लगेगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को इस सफलता पर बधाई दी है। इस सफलता के साथ सभी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी अब अगले चरण के के लिए विकसित की चा चुकी हैं। डीआरडीओ के अनुसार इस हाइपरसोनिक क्रूज यान को राकेट मोटर की मदद से प्रक्षेपित किया गया। गौरतलब हैं कि ये मिसाइलें मिनटों में दुनिया में कहीं भी मौजूद अपने टारगेट को ध्?वस्?त कर सकती हैं।

जानें, क्यों खास है हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल?

इस तकनीक का सबसे पहला परीक्षण भारत ने 2019 में भी किया था। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने और काफी कम खर्च में सैटेलाइन लॉन्च करने में इस तकनीक का इस्तमाल किया जाएगा। एचएसटीडीवी के परीक्षण का समय मात्र 20 सेकेंड था। इसकी रफ्तार 12,251 किलोमीटर थी। इस तकनीक के बाद उम्मीद बढ़ गयी है कि भारत के पास जल्द ही 12 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से मार करने वाले मिसाइल और विमान होंगे।

रक्षा क्षेत्र में देश की नई छलांग

1. अगली पीढ़Þी की मिसाइल तकनीक का परीक्षण
2. ध्वनि से तेज गुना तेज चल सकने वाला सिस्टम
3. यह तकनीक विकसित करने वाला भारत चौथा देश
4. दुनिया में कहीं भी मौजूद अपने टारगेट को ध्वस्त कर सकती हैं

 

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