पेन किलर को कैसे पता चलता है दर्द कहां है? जानिए शरीर में दवा के काम करने का तरीका

पेन किलर को कैसे पता चलता है दर्द कहां है? जानिए शरीर में दवा के काम करने का तरीका

Published On

जब शरीर के किसी हिस्से में चोट लगती है, सूजन आती है या किसी कारण से दर्द होता है, तो उस जगह की नसें दर्द से जुड़े संकेत दिमाग तक भेजती हैं। दिमाग इन संकेतों को समझता है और हमें दर्द का एहसास होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब हम पेन किलर की गोली खाते हैं, तो उसे कैसे पता चलता है कि दर्द सिर में है, पेट में है या पैर में?

दरअसल, पेन किलर को दर्द की जगह का पता नहीं होता। दवा शरीर में पहुंचने के बाद खून के जरिए अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचती है और वहां दर्द पैदा करने वाली प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है। यही वजह है कि दर्द वाली जगह पर हमें राहत महसूस होने लगती है।

चोट लगने पर शरीर में क्या होता है?

जब शरीर के किसी हिस्से में चोट, सूजन या ऊतक को नुकसान पहुंचता है, तो वहां कई तरह के रासायनिक पदार्थ सक्रिय हो जाते हैं। इनमें प्रोस्टाग्लैंडिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये पदार्थ दर्द से जुड़ी नसों को अधिक संवेदनशील बना सकते हैं, जिससे दर्द के संकेत दिमाग तक पहुंचते हैं और हमें तकलीफ महसूस होती है।

दर्द वास्तव में शरीर की एक महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रणाली है। इसके जरिए शरीर हमें संकेत देता है कि कहीं कुछ गड़बड़ है और उस हिस्से को आराम या उपचार की जरूरत है।

पेन किलर शरीर में कैसे काम करती है?

जब हम पेन किलर की गोली लेते हैं, तो उसका सक्रिय घटक पेट और आंतों से अवशोषित होकर रक्त में पहुंचता है। इसके बाद रक्त उसे शरीर के विभिन्न हिस्सों तक ले जाता है। इसलिए दवा को यह पहचानने की जरूरत नहीं होती कि दर्द कहां हो रहा है। कुछ सामान्य दर्द निवारक दवाएं प्रोस्टाग्लैंडिन बनने की प्रक्रिया को कम करती हैं, जिससे दर्द और सूजन में कमी आ सकती है। वहीं, कुछ दूसरी दवाएं दर्द के संकेतों को नसों और दिमाग के स्तर पर प्रभावित करती हैं। इसी कारण अलग-अलग तरह के दर्द के लिए अलग-अलग दवाएं इस्तेमाल की जाती हैं। हर तरह के दर्द के लिए एक ही पेन किलर उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।

फिर दर्द वाली जगह पर ही राहत क्यों मिलती है?

यह बात थोड़ी दिलचस्प है। दवा पूरे शरीर में रक्त के साथ घूमती है, लेकिन चोट या सूजन वाली जगह पर दर्द से जुड़ी रासायनिक गतिविधि अधिक हो सकती है। जब दवा उन प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है, तो उसी हिस्से में दर्द और सूजन कम महसूस होने लगती है।

यानी आसान भाषा में समझें तो दवा दर्द की जगह खोजकर नहीं पहुंचती, बल्कि पूरे शरीर में घूमकर दर्द पैदा करने वाली प्रक्रिया को प्रभावित करती है।

कितनी देर में शुरू होता है असर?

पेन किलर का असर कितनी जल्दी शुरू होगा, यह दवा के प्रकार, उसकी खुराक, व्यक्ति के शरीर और भोजन समेत कई कारकों पर निर्भर करता है। कई सामान्य दर्द निवारक दवाओं का असर कुछ समय में महसूस होना शुरू हो सकता है, लेकिन हर दवा के लिए एक जैसा समय तय नहीं किया जा सकता।

क्या पेन किलर लेना हमेशा सुरक्षित है?

पेन किलर दर्द से राहत देने में मदद कर सकती हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इन्हें बिना जरूरत या लंबे समय तक लिया जाए। कुछ दर्द निवारक दवाओं के ज्यादा या गलत इस्तेमाल से पेट, किडनी, लिवर और हृदय-रक्तवाहिका तंत्र पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। जोखिम दवा के प्रकार, खुराक, अवधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

इसलिए दर्द होने पर बार-बार खुद से दवा लेने के बजाय दवा के पैकेट पर दिए निर्देशों का पालन करना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेना बेहतर है। खासतौर पर अगर दर्द लगातार बना हुआ है, बार-बार लौटता है या बहुत तेज है, तो केवल पेन किलर लेकर उसे दबाने के बजाय उसके कारण का पता लगाना जरूरी है।

About The Author

Related Posts