Gharial News: वन विभाग की गश्ती टीम नदियों के क्षेत्र में कर रही थी निगरानी, अचानक दिखा दुर्लभ घड़ियाल!

वन्यजीव संरक्षण को मिली नई उम्मीद

Manmohan Picture
Published On

गुवाहाटी। असम की नदी प्रणालियों से लगभग विलुप्त माने जा रहे घड़ियाल की काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पुनः मौजूदगी दर्ज होने से वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में नई आशा का संचार हुआ है। वन विभाग के अधिकारियों ने इसे राज्य की नदी पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व की निदेशक सोनाली घोष के अनुसार, 26 अप्रैल को बुरापहाड़ रेंज के मैते एंटी-पोचिंग कैंप के निकट एक घड़ियाल को नदी किनारे रेतीले क्षेत्र में धूप सेंकते हुए देखा गया। यह दुर्लभ दृश्य उस समय सामने आया जब वन विभाग की गश्ती टीम डिफोलू और ब्रह्मपुत्र नदियों के संगम क्षेत्र में निगरानी कर रही थी। Gharial News

विशेषज्ञों का मानना है कि नदी संगम और रेतीले तट घड़ियालों के लिए अत्यंत उपयुक्त आवास होते हैं, जहां वे भोजन, विश्राम और प्रजनन जैसी गतिविधियां करते हैं। वन अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती दृश्य के बाद आगामी दिनों में भी उसी क्षेत्र में घड़ियाल दिखाई देने की कई घटनाएं दर्ज की गईं। इन घटनाओं के फोटोग्राफिक प्रमाण भी प्राप्त हुए हैं। हाल ही में 8 मई को एक पर्यटक गाइड ने भी उसी क्षेत्र में घड़ियाल को देखा। असम सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस दुर्लभ दृश्य को वन्यजीव संरक्षण के लिए ऐतिहासिक क्षण बताया। अधिकारियों का कहना है कि यह राज्य के जंगलों, नदियों और आर्द्रभूमियों में लंबे समय से चल रहे संरक्षण प्रयासों की सकारात्मक सफलता का संकेत है।

घड़ियाल एक अत्यंत दुर्लभ जलीय सरीसृप है, जिसकी पहचान उसकी लंबी और पतली थूथन से होती है। यह मुख्य रूप से मछलियों का शिकार करता है और मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बीते दशकों में घड़ियालों की संख्या में लगभग 98 प्रतिशत तक गिरावट आई है और वर्तमान में विश्व में इनकी प्रजनन योग्य आबादी बेहद सीमित रह गई है। भारत में इनकी प्रमुख उपस्थिति राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, कटारनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य तथा बिहार की गंडक नदी क्षेत्र में दर्ज की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि घड़ियाल किसी भी नदी तंत्र के स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि संबंधित नदी क्षेत्र में जैव विविधता और जलीय जीवन अभी भी सुरक्षित है।

काजीरंगा प्रशासन द्वारा भारतीय वन्यजीव संस्थान, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ तथा अन्य संरक्षण संस्थाओं के सहयोग से किए गए हालिया सर्वेक्षणों में क्षेत्र में एक अकेली मादा घड़ियाल की उपस्थिति दर्ज की गई थी। इसके साथ ही यहां कई प्रकार के जलीय जीव भी पाए गए, जिससे भविष्य में घड़ियाल पुनर्वास परियोजनाओं को बल मिलने की संभावना बढ़ गई है। उल्लेखनीय है कि Kaziranga National Park विश्व प्रसिद्ध एक सींग वाले भारतीय गैंडे सहित अनेक दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित आवास माना जाता है। यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल यह राष्ट्रीय उद्यान अपनी समृद्ध जैव विविधता और सफल संरक्षण प्रयासों के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान रखता है। Gharial News

About The Author

Related Posts