सड़कों पर बढ़ता दबाव, घरों में जगह की कमी; समय की मांग है पार्किंग नीति

सिमटती जगह और बढ़ते वाहन, बने पार्किंग नीति 

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संजीव राणा, जयपुर
देश में निजी वाहन रखना अब पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है। सरल ऋण सुविधा और मासिक किस्तों की व्यवस्था ने मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए भी कार खरीदना संभव बना दिया है। दूसरी ओर, शहरों की सड़कें और पार्किंग व्यवस्था उसी गति से विकसित नहीं हो सकीं। यही कारण है कि आज वाहन खरीदने की खुशी के साथ उसे सुरक्षित खड़ा करने की चिंता भी जुड़ गई है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के वाहन पोर्टल के अनुसार मई 2026 तक देश में पंजीकृत मोटर वाहनों की संख्या 42 करोड़ से अधिक पहुंच चुकी थी। वहीं वाहन विक्रेता संघ के आंकड़े बताते हैं कि जून 2026 में ही लगभग 25 लाख से अधिक नए वाहन बिके। इन बढ़ते आंकड़ों से स्पष्ट है कि वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि नगरों का आधारभूत ढांचा अपेक्षित गति से विस्तृत नहीं हो पाया है।

इसका सबसे बड़ा असर पार्किंग व्यवस्था पर दिखाई देता है। आज लगभग हर शहर में शाम ढलते ही आवासीय क्षेत्रों की गलियां वाहनों से भर जाती हैं। दफ्तर से लौटने वाले लोगों को अपनी ही बस्ती में वाहन खड़ा करने के लिए कई चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार मजबूरी में सड़क किनारे वाहन छोड़ना पड़ता है, जिससे दुर्घटना, चोरी, क्षति या यातायात नियमों के उल्लंघन की आशंका बनी रहती है। यह परेशानी अब महानगरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मध्यम और छोटे शहरों में भी तेजी से बढ़ रही है। समस्या का एक कारण अनियोजित शहरी विकास भी है। अनेक आवासीय क्षेत्रों का निर्माण उस समय हुआ था, जब परिवारों के पास एक या दो वाहन होना सामान्य नहीं था। आज एक ही घर में कई वाहन होना आम बात बन गई है, जबकि गलियां और सार्वजनिक स्थान पहले जैसे ही हैं। नई आवासीय योजनाओं में भी पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जाता। इस चुनौती का समाधान दूरदर्शी योजना से ही संभव है। नगर नियोजन में पार्किंग को मूल सुविधा के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। बहुस्तरीय वाहन गृह, सार्वजनिक पार्किंग स्थलों का विस्तार और आवासीय क्षेत्रों में सुव्यवस्थित व्यवस्था विकसित करना समय की आवश्यकता है। साथ ही नागरिकों को भी सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्थित ढंग से वाहन खड़े करने से बचना चाहिए। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के इस दौर में पार्किंग की समस्या सुविधा का नहीं, जीवन की गुणवत्ता का प्रश्न बन चुकी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में यह चुनौती और गंभीर हो सकती है। वाहन खरीदने की सुविधा तभी सार्थक होगी, जब उसे सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान भी उपलब्ध हो।
(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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