Monsoon 2025: इस बार भी भारत में खूब बरसेगा मॉनसून, जाने किस राज्य में कहाँ कितनी होगी बारिश?

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Monsoon 2025:  हिसार, सच कहूँ/संदीप सिंहमार। भारत में कृषि व्यवस्था का उतार-चढ़ाव दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर निर्भर करता है। ऐसी स्थिति में पूरे देशवासियों को यह इंतजार रहता है कि इस बार मॉनसून के केंद्रीय कार्यालय ने मॉनसून को लेकर खुशखबरी प्रदान की है। इस मौसम बुलेटिन से हर किसी को राहत मिलने की उम्मीद है। भारत मौसम विभाग इस बार भारत में एल-नीनो और इंडियन ओशियन डाइपोल स्थितियां सामान्य रहने की उम्मीद है, जिससे मानसून के दौरान अच्छी बारिश होगी। भारत मौसम विभाग में इस बार बारिश के सीजन में औसत से ज़्यादा बारिश की उम्मीद जताई है। हर वर्ष, भारतीय मॉनसून अपने साथ बारिश लेकर आता है, जो न केवल खेती के लिए आवश्यक है, बल्कि जलस्रोतों की भर पूर्ति और समाज के जीवन स्तर में सुधार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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इस वर्ष मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि एल-नीनो और इंडियन ओशियन डाइपोल की स्थितियां सामान्य रहने की उम्मीद है। एल-नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जो समुद्र की सतह के तापमान में वृद्धि के कारण होती है और इसका प्रभाव पूरे विश्व में मौसम पर पड़ता है। हालांकि, जब एल-नीनो की स्थिति सामान्य होती है, तो इसका प्रभाव मॉनसून पर अधिक सकारात्मक होता है।

इसी प्रकार, इंडियन ओशियन डाइपोल भी समुद्री सतह के तापमान की असमानता को दर्शाता है। सामान्य आईओडी की स्थिति मानसून के दौरान बारिश की संभावना को बढ़ाती है। जब आईओडी सामान्य होता है, तो यह भारत में वर्षा की संभावनाओं को मजबूत करता है, परिणामस्वरूप अधिक कृषि उत्पादन की दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।

इन दोनों घटनाओं के सामान्य रहने से भारत में मानसून की वर्षा में वृद्धि की उम्मीद है। इससे किसानों को फसल उत्पादन में मदद मिलेगी, और कृषि उत्पादकता में सुधार होगा। यह न केवल ग्रामीण इलाकों के लिए फायदेमंद होगा, बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता में भी योगदान करेगा।

देश भर में 105 फीसदी बारिश का अनुमान | Monsoon 2025

मौसम विज्ञान विभाग( आईएमडी) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण अनुमान प्रस्तुत किया है, जिसमें कहा गया है कि 2025 में पूरे देश में औसत से 105 फीसदी अधिक बारिश होने की संभावना है। यह जानकारी भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था के संदर्भ में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां एक बड़ी संख्या में लोग कृषि पर निर्भर हैं। बारिश का सीधा प्रभाव फसल उत्पादन और कृषि विकास पर पड़ता है। यदि वर्षा की मात्रा बढ़ती है, तो इसका मतलब है कि फसलों की जल आपूर्ति में सुधार होगा, जिससे उत्पादकता बढ़ सकती है। यह अनुमान किसानों के लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि अधिक वर्षा से उनकी फसलों की उपज में वृद्धि हो सकती है। इससे न केवल किसान की आय में सुधार होगा, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा।

लद्दाख,पूर्वोत्तर व तामिल में होगी कम बारिश

हालांकि सभी क्षेत्रों के लिए यह अनुमान समान रूप से अनुकूल नहीं है। लद्दाख, पूर्वोत्तर और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। ये क्षेत्र पहले से ही जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। कम बारिश के कारण फसल उत्पादन में कमी आ सकती है, जिससे यहां की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए, सरकार और संबंधित संस्थाओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश के विभिन्न हिस्सों में वर्षा का सही उपयोग हो सके। पानी के संरक्षण और संसाधनों के प्रबंधन के लिए योजनाएं बनाना आवश्यक होगा, ताकि अधिक वर्षा के लाभ का अधिकतम लाभ उठाया जा सके और कम बारिश वाले क्षेत्रों को भी उचित सहायता प्रदान की जा सके।

मई में जारी होगा दूसरा मौसम बुलेटिन | Monsoon 2025

भारत मौसम विभाग के प्रमुख मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि साल 2025 में मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। मानसून के दौरान औसत बारिश 87 सेंटीमीटर के दीर्घकालिक औसत का अनुमान लगाया गया है। अच्छी बारिश की वजह से किसानों और जल संकट झेल रहे इलाकों को बड़ी राहत मिलेगी। बता दे कि आईएमडी ने मॉनसून का अभी सिर्फ पहला बुलेटिन जारी किया गया है। इसके बाद मास मई मध्य में भारत मौसम विभाग सटीक संभावना का अलर्ट जारी करेगा।

जून तक जारी रहेगा लू का कहर

अप्रैल से जून तक, जब गर्मियों का मौसम अपने चरम पर होता है, तब भारत के विभिन्न हिस्सों में लू का कहर बढ़ने की संभावना होती है। इस संदर्भ में, मौसम वैज्ञानिक मृत्युंजय महापात्र ने इस बात की ओर संकेत किया है कि इस अवधि में लू की तीव्रता में वृद्धि होने की आशंका है। यह न केवल मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है, बल्कि इसके कई अन्य गंभीर परिणाम भी हो सकते हैं, जिनमें जल संकट और बिजली ग्रिड पर अधिक लोड शामिल हैं। गर्मी के बढ़ने के साथ, लोगों की बिजली की मांग में भी अत्यधिक वृद्धि होती है। अधिकतर लोग कूलर और एयर कंडीशनर का उपयोग करने लगते हैं, जिससे पावर ग्रिड पर लोड बढ़ता है। इस अतिरिक्त भार के कारण, ग्रिड की कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, और इसके परिणामस्वरूप बिजली कटौती या ब्लैकआउट की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। ये घटनाएँ सामान्य जनजीवन को बाधित करती हैं और आर्थिक गतिविधियों पर असर डालती हैं।

डिहाइड्रेशन व लू में जाने से बचे

लू के कारण स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। अत्यधिक गर्मी में लोग डिहाइड्रेशन, थकावट, और हीट स्ट्रोक जैसे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का शिकार हो सकते हैं। इस तरह की स्वास्थ्य समस्याएं विशेष रूप से कमजोर वर्गों, जैसे कि बुजुर्ग और छोटे बच्चे, के लिए अधिक खतरनाक होती हैं।

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