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Organic Farming : प्रकृति संतुलन का आधार- जैविक खेती

Organic Farming जैविक खेती (Organic Farming) कृषि की वह प्रवृत्ति है जिससे पर्यावरण के स्वच्छ एवं प्राकृतिक संतुलन को कायम रखते हुए भूमि, जल और वायु को प्रदूषित किये बिना लंबे समय तक संतोषजनक उत्पादन प्राप्त किया जाता है। इस पद्धति में रसायनों का प्रयोग कम से कम एवं आवश्यकतानुसार किया जा सकता है। इसमें […]
देश  विचार  न्यूज़ ब्रीफ 

क्या प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का परिणाम है कोरोना और तूफान, जानें प्रसिद्ध पर्यावरणविद् की जुबानी

नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् अनिल प्रकाश जोशी ने मंगलवार को कहा कि विलासितापूर्ण जीवन के लिए पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ के कारण ही कोरोना महामारी और बार बार चक्रवाती तूफानों का लोगों को सामना करना पर रहा है। पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित डॉक्टर जोशी ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् की […]
देश  न्यूज़ ब्रीफ 

प्रकृति का कहर और हमारी जिम्मेवारी

अरब सागर से उठे ताऊते चक्रवाती तूफान से 26 मौतें हो गई और 49 लोग अभी भी लापता हैं। जल सेना की बहादुरी को सलाम है, जिन्होंने 186 लोगों की जानें बचा ली। समय से पूर्व चेतावनी मिलने के कारण भारी जानी नुक्सान से बचाव हो गया, लेकिन बड़े स्तर पर माली नुक्सान होने से […]
विचार 

प्राकृतिक संसाधनों की हो रक्षा

वायु प्रदूषण के मामले में हमारी स्थिति दुनिया में सबसे ज्यादा खराब है। स्विस आॅर्गनाइजेशन द्वारा तैयार वर्ल्ड एयर क्वालिटी रिपोर्ट, 2020 में बताया गया है कि दुनिया के 30 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में हमारे देश के 22 शहर शामिल हैं। हमारे यहां वायु की गुणवत्ता इतनी खराब है कि अस्थमा, हृदय रोग, फेफड़ों […]
विचार 

प्राकृतिक विश्व की हिफाज़त करने 27 मार्च को होगा अर्थ-ऑवर

उदयपुर। प्राकृतिक विश्व की हिफाज़त करने में जन-जन के जुड़ाव को सुनिश्चित करने के लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से 27 मार्च को रात्रि 8.30 बजे से 9.30 बजे तक अर्थ-ऑवर का आयोजन रखा गया है। डब्ल्यू डब्ल्यू एफ इंडिया के उदयपुर संभागीय अधिकारी अरूण सोनी ने बताया कि ‘स्विच ऑफ एण्ड स्पीक अप फॉर नेचर’ […]
राजस्थान 

वक्त है प्राकृति को सहेज लें

अभी भी वक्त है, हम जाग जाएं अन्यथा प्रकृति कब तक अनावृत्त होकर हमारे अनाचार सहती रहेगी। जिस प्रलय का इंतजार हम कर रहे हैं, वह एक दिन इतने चुपके से आयेगी कि हमें सोचने का मौका भी नहीं मिलेगा। उपरोक्त पंक्तियां पेश हो रहे राष्ट्रीय व प्रादेशिक बजटों में पर्यावरण की अनदेखी को लेकर […]
विचार 

प्रकृति का संदेश, कोरोना का परिवेश

कोरोना वायरस रोग (कोविड-19) वैश्विक संक्रामक महामारी है। लगभग सम्पूर्ण विश्व की अर्थ.ब्यवस्था इससे प्रभावित हुई है। भारत ने इस संकटकाल में जनता के स्वास्थ्य व दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु सभी आवश्यक कदम उठाते हुए आत्म.विश्वास व अभूतपूर्व क्षमता का परिचय दिया है। प्राय: विपत्तियाँ आती हैं, और समाज को चेतावनी व संदेश देकर […]
लेख 

प्रेरणा स्रोत: प्रकृति से मिली प्रेरणा

तभी उनके मित्र ने उनसे कहा, ‘दोस्त, सागर में ऐसा क्या है जिसे तुम इतना गौर से देख रहे हो।’ कलाम मुस्कुरा कर बोले, ‘सागर का सौंदर्य और उसमें छिपा संदेश मेरे लिए प्रेरणा का केंद्र है और हमेशा रहेगा।’
लेख 

जीवन के लिए आक्सीजन से ज्यादा जरूरी है ओजोन

दुनिया में हर मनुष्य सुख और आनन्द का जीवन जीना चाहता है। यह प्रकृति का विधान है। मगर मानव सभ्यता के विकास के साथ साथ पृथ्वी पर विचरण करने वाले प्राणी सुख के साथ दु:ख के भी शिकार हुए है। कहीं रोटी, कपडा और मकान का संकट आ खड़ा हुआ तो कहीं मानव जनित समस्याओं […]
लेख 

प्रकृति की चेतावनियों को कब तक अनदेखा करेंगे हम?

देश के एक दर्जन से अधिक राज्यों में पिछले कुछ दिनों के भीतर कुदरत ने अपना जो कहर बरपाया है, वह कुदरत के साथ बड़े पैमाने पर हो रही मानवीय छेड़छाड़ का ही दुष्परिणाम है। कुदरत के कहर से हो रही भारी तबाही का आलम यह है कि प्रचण्ड धूल भरी आंधियों, बेमौसम बर्फबारी, ओलावृष्टि, […]
सम्पादकीय 

प्रकृति के रौद्र रूप को कब तक अनदेखा करेंगे हम?

योगेश कुमार गोयल इस साल अप्रैल माह से ही देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग रूपों में प्रकृति का जो प्रकोप देखा जा रहा है, उससे हर कोई चिंतित और बेबस है। कहीं आंधी तूफान में परिवर्तित होकर सैंकड़ों लोगों का काल बन गई तो कहीं भारी बारिश, बर्फबारी, आसमान से गिरती बिजली ने […]
लेख 

धर्मों पर रंग का ठप्पा

सूर्योदय का मनमोहक आनंद पूरी दुनिया लेती है। उगते हुए सूर्य का रंग केसरी होता है। यह मनमोहक दृश्य हिंदू, सिक्ख, ईसाई, मुस्लमान सब धर्मों के लोगों को एक जैसा दिखाई पड़ता है। सूर्य सारी दुनिया में उगता है व अस्त होता है, जिसकी लालिमा एवं केसरिया रंग पूरी दुनिया को ऊर्जा एवं जीवन प्रदान […]
सम्पादकीय