सरसा बना उत्तर भारत की तैराकी प्रतिभाओं का संगम, खिलाड़ियों ने कहा—ऐसी व्यवस्थाएं कहीं नहीं देखीं
खिलाड़ियों के प्रदर्शन के साथ आधुनिक खेल सुविधाएं और उत्कृष्ट प्रबंधन भी रहे आकर्षण का केंद्र
सरसा (सच कहूँ/राजेश बेनीवाल)। MSG Bhartiya Khel Gaon: खेल केवल जीत और हार का नाम नहीं, बल्कि अनुशासन, समर्पण और निरंतर मेहनत की पहचान है। इसका जीवंत उदाहरण शनिवार को सरसा स्थित एमसजी भारतीय खेल गांव डेरा सच्चा सौदा में चार दिवसीय सीबीएसई नार्थ जोन-2 बॉयज वर्ग स्विमिंग चैंपियनशिप में देखने को मिला। इस प्रतियोगिता में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से आए लगभग 1178 खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए एक मंच पर जुटे। प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ियों का उत्साह, कोचों का मार्गदर्शन, अधिकारियों की मौजूदगी और दर्शकों का जोश पूरे आयोजन को यादगार बना रहा था।
प्रतियोगिता में हर आयु वर्ग के खिलाड़ी अपने-अपने इवेंट में पूरे आत्मविश्वास के साथ उतरे। प्रात:काल से ही स्विमिंग पूल परिसर में खिलाड़ियों की तैयारियां शुरू हो गई थीं। कोई वार्म-अप में व्यस्त था तो कोई अपने कोच से अंतिम रणनीति पर चर्चा कर रहा था। आयोजन समिति ने खिलाड़ियों और अधिकारियों के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की थीं। प्रतियोगिता स्थल पर सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा, विश्राम स्थल, पेयजल, भोजन और अन्य आवश्यक इंतजाम किए गए थे। खिलाड़ियों व उनके पेरेंट़स ही नहीं उनके कोचेज ने भी व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि बेहतर माहौल मिलने से प्रतियोगिता पर पूरा ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।
प्रतियोगिता में मौजूद अधिकारियों का कहना था कि उत्तर भारतीय स्विमिंग चैंपियनशिप केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देने वाला मंच भी साबित हो रही है। यहां कई ऐसे खिलाड़ी मौजूद हैं जिनका लक्ष्य राष्ट्रीय टीम में जगह बनाना और भविष्य में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। यदि इसी प्रकार खिलाड़ियों को अवसर, सुविधाएं और मार्गदर्शन मिलता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब भारतीय तैराक भी विश्व स्तर पर देश का नाम रोशन करेंगे।
भाई व्यवस्था एवन है भाई आडै की....
हरियाणा के दिल कहे जाने वाले जिले जींद से आए 12वर्षीय खिलाड़ी लक्की का अंदाज ही बता रहा था कि इस प्रतियोगिता में कुछ कर गुजरने का हौसला है। लक्की ने हरियाणवी अंदाज में बताया कि ‘‘भाई आड़ै की व्यवस्था तो एवन है मन्ने इसके अलावा कड़े भी नहीं देखी।
गुरुजी ने तोड़ पाड़ राख्या सै’’ यहां का वातावरण काफी सकारात्मक है। प्रतियोगिता का स्तर अच्छा है हम कई जगहों पर स्विमिंग प्रतियोगिता में गए लेकिन यहां जैसी सुविधाएं कहीं नहीं मिली। हम चार दोस्त अकेले आए हैं और हमें इतना भी पता नहीं था कि यह स्टेडियम कहां है लेकिन हमें यहां की परिवहन सुविधा ने कहीं भटकने नहीं दिया।
ऐसे आयोजन खिलाड़ियों को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करते हैं
एक अन्य प्रतिभागी आर्यवीर गुरुग्राम से अपने पिता अनिल ठाकुर के साथ प्रतियोगिता में शामिल होने आया था ने कहा, " इससे पहले मैं फ्री स्टाइल में सिल्वर मैडल जीत चुका हूं। खिलाड़ी के पिता ने संतोष जताते हुए बताया कि यहां पर आकर अच्छा लगा रहा है क्योंकि खेल स्टेडियम में सुविधाएं वाकई में बेहतरीन हैं। वहीं बच्चों को उत्तर भारत के अलग-अलग राज्यों के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने से काफी सीखने का अवसर मिलता है।
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आधुनिक तरणताल को रैटिंग में दस में से दस नंबर
प्रतियोगिता में पूर्वोत्तर भारत के सेवन सिस्टर्स कहे जाने वाली श्रेणी के अरुणाचल प्रदेश से आये हुए कोच एम. थोबा ने बताया कि वे अपने साथ पांच प्रतिभागियों को लेकर आये हैं जिनमें से दो ने राष्टÑीय प्रतियोगिता में भी भागीदारी की है। यहां पर देख रहे हैं कि जो तरणताल बना हुआ है जो आधुनिक तकनीक व सैंसर लगे हुए हैं जिससे बिना किसी गड़बड़ी के स्टीक परिणाम प्राप्त हो जाते हैं। यह बेहद जरूरी है क्योंकि कई बार बच्चे बिना इस तकनीक से छोटे से पाईंट से अपना स्थान गंवा देते हैं।
आधुनिक प्रशिक्षण, फिटनेस, वैज्ञानिक अभ्यास और खिलाड़ियों की बढ़ती रुचि के कारण भविष्य में भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। थोबा ने बताया कि पता चला है कि यहां के गुरुजी हैं जो 32 खेलों में पारंगत हैं और उनके मार्गदर्शन में बना यह स्टेडियम आधुनिक है ऐसे तरणताल भारत में तो कम ही हैं। मुझे अगर रैटिंग देनी पडेÞ तो इसको दस में से दस नंबर दूंगा।
पेरेंट्स ने भी सराही सेवाभाव व सुविधाएं
हरियाणा से अपने बच्चे किआन कार्जी के साथ आई हिना महेश्वरी ने बताया कि हम अपने बच्चे को अंडर 11 में पार्टिस्पेट करने के लिए आये हैं। मैं गुरुग्राम दिल्ली ह नहीं कई जगहों पर गई हूं लेकिन यहां के तरणताल में जो सफाई व क्लियरीटी देखी है वो मुझे यहां की बहुत अच्छी लगी काफी जगहों पर देखा है मैंनें इतनी सफाई नहीं देखने को मिलती।
हिना ने एक प्रतियोगिता का जिक्र करते हुए बताया कि वहां खिलाड़ियों के अभिभावकों को बैठने की भी सुविधा नहीं थी लेकिन यहां पर तो सेवादारों की बातें ही कुछ ओर है बिना मांगे ही पानी-चाय दिए जा रहे हैं। वास्तव में गुरुजी ने स्टेडियम में चार चांद लगा रखे हैं ऐसे बेहतनीन सुविधाएं बाकि जगहों पर तो पोसिबल ही नहीं है।