सरकार की दोहरी नीति शराब का कारोबार

Published On

शायद सरकारें शराब के कहर से सीख नहीं लेना चाहती। पिछले माह कई राज्यों में शराब से बड़ी संख्या में मौतें होने के बाद भी शराब को बढ़ावा देने वाली सरकारी नीतियां ज्यों की त्यों जारी हैं। ताजा मामला पंजाब सरकार का है जिसने अपनी नई आबकारी नीति के तहत शराब के कोटे में विस्तार किया है। हालांकि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने से पूर्व हर साल शराब के 5 प्रतिशत ठेके बंद करने का वायदा किया था सरकार का नया निर्णय यही साबित करता है कि शराब की मांग बढ़ रही है। स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों की अपेक्षा शराब के ठेकों की संख्या बढ़ रही है। शराब के ठेके घटाने के वायदे का एक ही अर्थ था कि लोगों को शराब की आदत से निजात दिलाई जाए।

यह दोहरी नीति ही साबित होती है कि ठेके घटाए जाएंगे और शराब बढ़ाई जा रही है। दरअसल सरकारें शराब को नशा घोषित करने से संकुचा कर रही हैं और शराब के ठेके बंद करवाने का स्वांग भी कर रही हैं। यदि शराब नशा नहीं है तब शराब के ठेके घटाने का कोई मतलब ही नहीं। सरकार यह भी बताने के लिए तैयार नहीं कि आखिर शराब से राज्य व लोगों को आखिर क्या हासिल हुआ मिली है? यूं भी सरकार शराब की बिक्री बढ़ाकर मोटी कमाई करने का लालच जरूर कर रही है। राज्य के लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डालकर की गई कमाई किसी भी काम की नहीं।

नशा छुड़ाऊ मुहिम पर करोड़ों रुपए खर्चने वाली सरकार का शराब को प्रोत्साहन देना, तर्कहीन व गैर-वैज्ञानिक बातें हंै। हेरोइन, स्मैक की तरह शराब भी स्वास्थ्य को बर्बाद करती है। पंजाब की युवा पीढ़ी दूध, दही, लस्सी, घी को छोड़ शराब व अन्य नशों की तरफ दौड़ रही है। विवाहों-शादियों में पैग की चर्चा वाले गीतों पर नाचने वाले युवाओं के लिए शराब स्टेटस सिंबल बन गया है। यह बेहद हैरानीजनक बात है कि जो शिक्षण संस्थान व पारंपरिक स्थान नशों से बचने का संदेश देते हैं उन्हें जिंदा रखने के लिए शराब की कमाई का सहारा लेना सरकारों की नीतियों के दीवालीयेपन का प्रतीक है।

यूनिवर्सिटियों-कॉलेजों में दाखिलों में आ रही कमी व शराब के ठेकों का बढ़ना प्रदेश में विकास में गिरावट का प्रमाण है, जिसकी जिम्मेदारी से सरकार अपना हाथ नहीं छुड़ा सकती। शराब व स्वास्थ्य एक मियान में दो तलवारें रखने की तरह है। शराब से मुक्त युवा ही स्वस्थ बन सकते हैं। शराब की बोतलों पर लिखी चेतावनी हमारे नेताओं को पढ़नी चाहिए, जो पढ़ने में ज्यादा मुश्किल भी नहीं।

Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

About The Author

Related Posts