देश के अंदर देश न बनाएं

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हैदराबाद में असुद्दीन ओवैसी का दबदबा है, जहां गैर-मुस्लिम से भेदभाव किया जाता है। गुजरात व मुंबई में उत्तर भारतीयों को नफरत की भावना से देखा जाता है। जम्मू में वादी के कुछ संगठनों ने अन्य राज्यों के लोगों के लिए ‘इंडियन’ शब्द इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। अखंड भारत में यह रुझान भयावह व चिंता का विषय है। जिसकी जड़ें राजनीति से जुड़ी हुई हैं। अब फिर यह बात चर्चा में है कि 50 हजार से ज्यादा गैर-गुजरातियों को राज्य छोड़ना पड़ रहा है। हैदराबाद, अलीगढ़ सहित देश के कई ऐसे शहर हैं जिन्हें एक धर्म, जाति या भाषा विशेष के लोगों के शहर बना दिया गया है। देश के अंदर देश की धारणा भारतीय संस्कृति में कभी नहीं रही।

अमेरिका व यूरोप में जब एशियाई व भारतीय लोगों के साथ भेदभाव व दुर्व्यवहार होता है तो कुछ कट्टरपंथी संगठन हुल्लड़बाजी करते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के पुतले जलाने तक जाते है लेकिन उन देशों में जो समानता की परंपरा है उस बात की तरफ इन संगठनों का ध्यान कभी नहीं जाता। देश की मजबूती केवल बाहर के देश के किसी नेता के पुतले जलाने के साथ नहीं होनी बल्कि धार्मिक सद्भावना को मजबूत करने की आवश्यकता है। बहुलवाद देश के ढांचे, इतिहास व संस्कृति की विशेषता है। यदि लुधियाना में बिहार के लोग एमसी व जिला परिषद सदस्य बनने लगे हैं तो बिहार, दिल्ली, महाराष्टÑ में पंजाबी व सिख विधायक तक बन गए हैं।

यदि बात विदेशों की करें तब यह अंग्रेजों से बहुत कुछ सीखना चाहिए। कनाडा जैसे देशों ने तो अपना रक्षा विभाग ही भारतीय मूल के नेता के हाथों में सौंप रखा है। भारतीयों का सांसद-विधायक चुना जाना तो वहां आम बात है। भारतीय मूल के लोगों को सरकार-दरबार में समांतर बढ़ावा देने के साथ वह देश न तो कमजोर हुए और न ही उन्हें कोई खतरा महसूस हुआ, बल्कि निरंतर सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे हैं। अंग्रेजों के देशों ने पंजाबी भाषा को स्कूलों में लागू कर विश्व भाईचारे की भावना को मजबूत किया है।

पता नहीं हमारे देश में ही क्यों मुंबई, गुजरात व लुधियाना वालों को बिहारी से, हैदराबाद वालों को हिंदूओं व कश्मीरियों को गैर-काश्मीरियों से खतरा है। मूलवाद की यह विचारधारा ही देश के लिए सबसे बड़ा खतरा है लेकिन यह मूलवाद ही देश विरोधी ताकतों के लिए उपजाऊ जमीन बन गया है। राज्य सरकारों को ऐसे तत्वों के खिलाफ निष्पक्ष व सख्ती से कार्यवाही करनी चाहिए, जो एक देश के लोगों में फूट डालते हैं राजनैतिक पार्टियां वोटों का लालच छोड़कर भारत को सभी भारतीयों का देश बनाएं।

 

 

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