बड़े मुद्दे छोड़ एक दूसरे को उलझाने में लगे नेता

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लोकसभा चुनाव के चार चरण पूरे हो चुके हैं। अब तीन चरणों का चुनाव और बाकी है। लिहाजा सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों एक-दूसरे पर वार करने के लिए कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। वोटरों को प्रभावित करने और उन्हें अपने पक्ष में करने के लिए रोज नये-नये मुद्दे ईजाद किए जा रहे हैं। ऐसा ही एक मुद्दा बीजेपी को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मिला है। मुद्दा उनकी नागरिकता को लेकर है। गृह मंत्रालय ने हाल ही में राहुल गांधी को एक नोटिस जारी कर, पन्द्रह दिन के अंदर उनसे इस संबंध में तथ्यात्मक स्थिति की जानकारी देने को कहा है। जैसे ही यह खबर मीडिया में आई, बीजेपी कांग्रेस अध्यक्ष पर हमलावर हो गई। राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर नाहक ही सवाल उठाए जा रहे हैं। सारा देश जानता है कि वे कहां पैदा हुए और कहां उनकी परवरिश हुई। साल 1970 में भारत में जन्मे, राहुल गांधी साल 2004 से लगातार तीन बार लोकसभा के सदस्य चुने गए हैं।

इस दौरान उनकी नागरिकता पर कभी सवाल नहीं उठे। लोकसभा चुनाव का पर्चा भरते समय यह सारी जानकारी, हर प्रत्याशी को विस्तार से देना होती है। यदि राहुल गांधी की नागरिकता पर कोई शक होता, तो वे कैसे संसद में पहुंच जाते। जहां तक सुब्रह्मण्यम स्वामी की विश्वसनीयता का सवाल है, उन्हें उनकी ही पार्टी गंभीरता से नहीं लेती। चर्चा में रहने के लिए वे रोज-ब-रोज कोई नया शिगूफा छोड़ते रहते हैं। बीजेपी भी उनका इस्तेमाल करती रहती है। जिस मामले को अदालत पहले ही खारिज कर चुकी है, उस मामले में चार साल बाद गृह मंत्रालय की ओर से नोटिस भेजा जाना, सवाल खड़े तो करता ही है। सरकार की नीयत को भी उजागर करता है। सवाल इसकी टाईमिंग को लेकर भी है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह से जब इस बारे में सवाल पूछा गया, तो उनका जवाब था कि ये एक सामान्य प्रक्रिया है और जब भी कोई सांसद किसी मंत्रालय से शिकायत करता है तो उस पर कार्रवाई की जाती है।

मंत्रालय कार्रवाई करे, इस पर किसी को क्या एतराज होगा। सच बात तो यह है कि इस लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी बीजेपी के पास देशवासियों के विकास के लिए ना तो कोई विजन है और ना ही नीति। बीजेपी के स्टार प्रचारक नरेन्द्र मोदी अपनी चुनावी सभाओं में विपक्ष पर कई इल्जाम, तोहमतें तो लगाते हैं, लेकिन वे सत्ता में आए, तो देशवासियों के लिए क्या करेंगे और उनके लिए क्या योजनाएं हैं, इस पर खामोश रहते हैं। पार्टी का चुनाव घोषणापत्र भी कोई उम्मीदें नहीं जगाता। पिछले पांच सालों में रोजगार, किसानों की समस्याएं, महिलाओं की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, विदेशी निवेश, विदेश नीति, देश का आंतरिक माहौल और सीमाओं पर सुरक्षा यानी हर मोर्चे पर मोदी सरकार नाकामयाब रही है। राहुल गांधी की नागरिकता का मुद्दा, पहले ही दम तोड़ चुका है। चुनाव में बीजेपी को अब शायद ही इससे कोई फायदा मिले।

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