महामारी को देखते हुए ऑनलाइन शिक्षा प्रबंध बढ़ाने होंगे

Published On

केंद्र सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान 21 सितंबर से स्कूल खोलने की अनुमति दे दी है लेकिन कई राज्य सरकारों को यह निर्णय गले नहीं उतर रहा। उन्हें दिल्ली, कर्नाटक, पश्चिमी बंगाल, पंजाब और यूपी सहित कई राज्यों ने स्कूल खोलने से इनकार कर दिया है। सुखद बात यह है कि फिलहाल इस मामले को राजनीति रंग नहीं दिया गया। प्रत्येक राज्य की अलग-अलग समस्याएं व परिस्थितियां हैं, इसीलिए ऐसे निर्णय राज्यों पर छोड़ देने चाहिए। पाबंदी लगाना या हटाना, ऐसे में किसी भी हित को साधने का प्रयास नहीं करना चाहिए विशेष रूप से बच्चों के मामले में यह बड़ा संवेदनशील मुद्दा है।

बच्चे मासूम और भोले होते हैं, वे अपने स्वास्थ्य का ख्याल नहीं रख सकते। दूसरे राज्यों को इस मामले में पूरे विवेक से काम लेकर सही फैसला लेना चाहिए। हालांकि जिस प्रकार कोरोना मरीजों की गिनती बढ़ रही है, उसके अनुसार हालात चुनौतीपूर्ण भी हैं। भले ही स्वस्थ होने वाले मरीजों की गिनती बढ़ रही है, फिर भी महामारी के प्रकोप को अनदेखा नहीं किया जा सकता। देश में मरीजों की गिनती 53 लाख को पार कर चुकी है और तकरीबन एक लाख नए मरीज रोजाना संक्रमित हो रहे हैं। केंद्र व राज्य सरकारों को आक्सीजन की उपलब्धता के साथ-साथ मेडिकल प्रबंधों में विस्तार करना पड़ रहा है।

सबसे अच्छी बात यह है कि भारत में रिकवरी रेट विश्व भर में सबसे ज्यादा है फिर भी नए मरीजों की गिनती बढ़ना चिंताजनक है। स्कूलों के मामले में बहुत प्रबंधकीय कौशल से काम करने की आवश्यकता है। निजी स्कूलों ने आॅनलाइन स्ट्डी के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई को ज्यादा प्रभावित होने से बचाया भी है। सरकारी स्तर पर भी कुछ हद तक आनलाइन पढ़ाई के प्रयास जारी हैं। महामारी को देखते हुए लग रहा है कि आॅनलाइन पढ़ाई की दिशा में और कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। कोई भी फैसला जल्दबाजी में लेने की अपेक्षा उस पर गहराई से विचार होना चाहिए।

 

अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

About The Author

Related Posts