पाक में अल्पसंख्यकों पर बढ़ रहे अत्याचार

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भारत को अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का उपदेश देने वाला पाकिस्तान खुद हिंदू भाईचारे की लड़कियों के जबरन विवाह के आरोपों में घिर चुका है। गत दिवस दो हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन कर उनकी शादी कर दी गई। यह मामला मीडिया में आने पर भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान सरकार को खरी-खरी सुनाई हैं। हालांकि पाक के मंत्री ने इसे आंतरिक मामला बताते हुए भारतीय आपत्ति को गैर-वाजिब बताया। इस मामले की गंभीरता का यहां से सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। दरसअसल पाक में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार का यह कोई पहला मामला नहीं। हिंदूओं के अलावा सिक्खों और ईसाईयों के साथ दुर्व्यवहार की कई घटनाएं घट चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन मामले को अनदेखा कर देता है। अल्पसंख्यकों की पाक में सुनवाई ही नहीं होती। कई बार तो पुलिस मामला ही दर्ज नहीं करती

फवाद चौधरी का यह दावा भी बेतुका है कि पाक में अल्पसंख्यक भारत की अपेक्षा अधिक सुरक्षित है। यदि पाक के शासक भारत में पाक से आए हिंदूओं की दुर्दशा को देखें तो उन्हें सहज ही पता लग जाएगा कि पाक में रहते हिंदू कितने सुरक्षित हैं। दिल्ली अजमेर, जोधपुर व अन्य स्थानों पर बैठे हिंदूओं को जब अधिकारी वापिस पाक जाने की हिदायत देते हैं तो वे एक ही बात कहते हैं, ह्यमर जाएंगे लेकिन पाकिस्तान नहीं जायेंगेह्ण। भारतीय नागरिकता व सुविधाएं न मिलने के बावजूद यह लोग खुले आसमान के नीचे जीवन व्यत्तीत करने के लिए तैयार है।

धार्मिक वीजा पर आए हिंदू वीजा पूरा होने के बावजूद वे यहां रहने के लिए ही डटे हुए है। भला जहां कोई पैदा हुआ हो, खेलकर बड़ा हुआ हो, उस धरती के साथ प्यार किसे नहीं होता। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के रहने के हालात ही नहीं है, इसीलिए वे भारत से वापिस जाने का नाम ही नहीं ले रहे। समाज सेवा संस्थाएं इन दुखी लोगों की मदद कर रही है। पाक में नौकरियों में अल्पसंख्यकों के लोग आटे में नमक बराबर भी नहीं है। नि:संदेह फवाद चौधरी भारत को सलाह दें लेकिन पहले मामले की जांच जरूर करवाएं। यह मानवीय अधिकारों का संवेदनशील मामला है, पाक के शासक अपनी जिम्मेदारी को निभाएं।

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