भारत-पाक के लिए अमन ही एकमात्र रास्ता

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स्वतंत्रता दिवस से कुछ दिन पहले भारत-पाक ने अपनी जेलों में कैद एक-दूसरे देश के नागरिकों को रिहा कर अंधेरे रास्तों में आशा की किरण जगाई है। भारत ने 7 और पाक ने 30 नागरिकों को रिहा किया है। विशेष तौर पर पाकिस्तान ने अपनी जेल में 36 सालों से बंद जयपुर निवासी गजानन्द को रिहा कर बड़ा कदम उठाया है। ऐसे कैदियों की रिहाई की उम्मीद कम ही होती है। दशकों से बंद कैदियों के बारे में जानकारी देने से पाकिस्तान अपना पक्ष बदलता आया है। कैदियों की रिहाई इस बात का संकेत देती है कि सीमाओं पर तनाव के बावजूद दोनों देशों के बीच अमन-शांति की उम्मीद कायम है। यह भी एक संयोग है कि कैदियों की रिहाई तब हुई है जब पाकिस्तान में नई सरकार बन रही है। इमरान खान आज पाक के प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ले रहे हैं। चाहे इमरान ने चुनाव प्रचार में खुलकर भारत के साथ संंबंध सुधारने की बयानबाजी से संकोच ही किया था लेकिन चुनाव में बड़ी जीत प्राप्त करने के बाद उन्होंने भारत के साथ रिश्ते सुधारने की बात जोर से कही। इसी तरह इमरान खान ने भारतीय शख्सीयतों को अपने शथ ग्रहण समारोह में भी न्यौता देकर भारत से नजदीकी का माहौल बनाया है। यह कहना उचित होगा कि चाहे पाक में सेना का हाथ सरकार से ऊपर होता हैं फिर भी सरकार पड़ोसी देशों की अहमियत से इंकार नहीं कर सकती। पाकिस्तान में एक नई पार्टी सरकार बना रही है। बदल रहे विश्व के मद्देनजर कोई भी देश अलग होकर नहीं चल सकता। उसे दुनिया भर के देशों से सहयोग लेना और देना ही पड़ता है। इन हालातों में पड़ोसी देशों के साथ संबंध और बेहतर होना भी महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत उपमहाद्वीप में पाकिस्तान भारत की महत्वता से इंकार नहीं कर सकता। पाक के लिए भारत से बेहतर संबंध लाभप्रद हैं। दोनों में बड़े स्तर पर व्यापार चल रहा है। यदि अमन-शांति और परस्पर विश्वास बढ़े तो यह व्यापार ओर भी बढ़ सकता है जिससे दोनों देशों की नुहार बदल सकती है। उम्मीद करनी चाहिए कि नई सरकार पाक का नवनिर्माण करने के लिए भारत सहित अन्य पड़ोसी देशों के साथ संबंध सुधारने का प्रयास करेगी। अमन-शांति के बिना से नि:संदेह किसी देश की तरक्की असंभव है।

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