गांव लोहगढ़ में की जाती है 95 प्रतिशत धान की खेती

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प्रवासी मजदूरों के न मिलने से धान रोपाई में आ रही परेशानी

सच कहूँ/राजमीत इन्सां डबवाली। उपमंडल के गांव लोहगढ़ में 95 प्रतिशत धान की रोपाई की जाती है और अब मौसम में थोड़ा बदलाव होने के चलते किसानों ने धान की रोपाई शुरू कर दी है। इस बार प्रवासी मजदूरों को आने के लिए परमिशन न मिलने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान जसविंदर सिंह, कौरी सिंह बराड़, लखविंदर सिंह ने बताया कि गांव में ज्यादातर एरिया में धान की फसल की रोपाई की जाती है। जबकि इस बार प्रवासी मजदूरों को आने के लिए परमिशन ना मिलने के चलते किसानों को धान की रोपाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वहीं किसानों द्वारा नई टेक्नोलॉजी के तहत इस बार काफी एरिया में डीएसआर मशीनों के द्वारा धान की फसल की बिजाई की गई है। जबकि पहले इस एरिया में मजदूरों द्वारा ही धान की रोपाई की जाती थी और इस बार लेबर नहीं मिल रही। जबकि लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्य से प्रवासी मजदूरों को परमिशन ना होने के चलते इस बार प्रवासी मजदूरों नहीं आ पाए। जिसको देखते हुए किसानों ने इस बार धान की मशीनों द्वारा बिजाई की हुई है। उन्होंने बताया कि इससे किसानों को पानी की बचत के साथ-साथ अच्छी पैदावार होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

15 में से इस बार 2 एकड़ में की है मशीन धान बिजाई

किसान गुरमीत सिंह ने बताया कि उन्होंने 15 एकड़ में से 2 एकड़ की इस बार मशीन के द्वारा धान की बिजाई की हुई है। जिसमें उन्होंने अब तक दो बार पानी लगाया है जिसमें पानी की बहुत ज्यादा बचत है। उन्होंने बताया कि एक तो इससे पानी की बचत होगी। वहीं लेबर का पैसा भी बचेगा। जबकि अच्छी पैदावार होने पर वह अगली बार 15 एकड़ मशीन के द्वारा बिजाई करेंगे।

मशीन से बिजाई करने पर पानी व लेवर दोनों की बचत: सुनील कुमार

किसान सुनील कुमार सचदेवा ने बताया कि उन्होंने इस बार धान की बिजाई करने वाली मशीन डीएसआर (ड्रैक्ट सीडर राइस) मशीन से गांव में अढ़ाई सौ एकड़ धान की बिजाई की है। जबकि अपने खेत में खुद 19 एकड़ में मशीन से धान की बिजाई की हुई है और बहुत अच्छी फसल खड़ी है। पानी की बचत के साथ-साथ लेवर के खर्च की भी बचत है।
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