मेरा क्या कसूर! प्रशासन और ग्रामीणों के बीच फंसी ‘प्रदूषण युक्त घग्गर नदी’

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घग्गर में गिर रहे गंदे पानी को रोकने गई टीम तो ग्रामीणों ने विरोध कर रूकवाया काम (Polluted Ghaggar River)

सच कहूँ/तरसेम सिंह
जाखल। घग्गर नदी में फैली गंदगी का मुद्दा सच कहूँ में प्रमुखता से उठाने के बाद जब जिला प्रशासन द्वारा नदी में छोड़े जा रहे गंदे पानी की निकासी को रोकने के आदेश दिए तो घग्गर नदी ने सोचा कि शायद अब उसे स्वच्छता मिलेगी। लेकिन मुसीबत तब खड़ी हो गई जब प्रशासनिक टीम जेसीबी के साथ गांवों में तो पहुंची लेकिन ग्रामीण रूकावट बनकर सामने खड़े हो गए। ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए काम रूकवा दिया और टीम को मजबूरन बेरंग लौटना पड़ा। दरअसल हुआ यूं कि वीरवार को जिला उपायुक्त और हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निदेर्शानुसार अधिकारियों की गठित एक कमेटी गांव साधनवास और सिधानी में पहुंची।

अधिकारियों की ओर से एक जेसीबी के माध्यम से गांव सिधानी के गंदे पानी की निकासी को घग्गर नदी के सहायक नाले में गिरने से रोकने का कार्य शुरू किया गया। तो ग्रामीण तुरंत लामबंद हो गए और विरोध जताते हुए काम रूकवा दिया। उन्होंने जेसीबी को बंद करवाकर टीम को खदेड़ दिया। ऐसे में जहां प्रशासन घग्गर नदी में गंदा पानी रोकना चाहता है वहीं ग्रामीणों का कहना है कि उक्त नदी हमारी वजह से नहीं बल्कि कैमिकल फैक्ट्रियों की वजय से दूषित हो रही हैं।

ग्रामीण बोले, पहले निकासी का प्रबंध हो, उसके बाद टीम करे अपना काम

गांव सिधानी के अमित कुमार, सतीश कुमार, पूर्व सरपंच बिक्कर सिंह, संजीव चौधरी, धर्मवीर, प्रवीण शर्मा, अंग्रेज, विक्रम, जंगशेर, कृष्ण कुमार, अजय सिधानी, गुरचरण, बिंदर, जगविंदर ने बताया कि हरियाणा सरकार बरसाती पानी को इसमें डालने से रोक रही है। जो सरासर उनके साथ धक्के शाही है। अगर उनका बरसाती पानी इस नाले में नहीं गिरेगा तो ऐसे में उनका गांव डूब जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि पहले उनके गांव में गंदे पानी की निकासी और बरसाती पानी की निकासी का जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन प्रबंध करें उसके पश्चात ही उनके गांव के पानी को इस गंदे नाले में डालने से रोका जा सकता है।

Protest

केमिकल फैक्ट्रि संचालकों पर सरकार क्यों नही करती कार्रवाई

कुछ वर्ष पहले ही लाखों रुपए की लागत से गांव की जोहड़ों में जमा हुआ बरसाती पानी घग्गर में डालने के लिए नाला बनाया गया था। जिसे बंद करने के लिए वीरवार को प्रशासन पहुंचा था लेकिन ग्रामीणों ने ये कहकर काम रूकवा दिया कि घग्गर अगर दूषित होती है तो वह पंजाब स्थित राजपुरा, पटियाला, चंडीगढ़ जैसे शहरों में लगी नदी के साथ बड़ी संख्या में केमिकल फैक्ट्रियां की वजह से होती है। जिनका केमिकल युक्त पानी नदी में गिरता है। फतेहाबाद जिले में नदी के किनारे कोई दूषित करने वाली फैक्ट्री नहीं है। सरकार इन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई करें न की हम पर।

‘‘जिला उपायुक्त और एनजीटी के निदेर्शानुसार घग्गर नदी में गिरने वाले गंदे पानी को रोकने के लिए गए थे लेकिन ग्रामीणों ने इसका विरोध किया। उन्होंने बताया कि गांव तलवाड़ा, तलवाड़ी, साधनवास के लिए एस्टीमेट पास हो चुका है। वही गांव सिधानी के लिए भी प्रपोजल तैयार कर एस्टीमेट बनाया जाएगा और उनके गांव का पानी गांव में ही जोहड़ों में छोड़ा जाएगा।
-संजीव भाटिया, कार्यकारी अभियंता, पंचायत विभाग।

अधिकारियों और पंचायती राज विभाग यह सुनिश्चित करें कि गांव के गंदे पानी की निकासी का डिस्पोजल घग्गर में न करके अन्य स्थान पर किया जाए। प्रदूषण गंभीर समस्या है। गांव के गंदे पानी और फैक्ट्रियों के प्रदूषित जल से घग्गर नदी प्रभावित नहीं होनी चाहिए। संबंधित विभाग अगर इस विषय पर कोई उपाय नहीं करते हैं तो एनजीटी के आदेशों के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड उन पर जुमोना लगा सकता है।
-महावीर कौशिक, उपायुक्त फतेहाबाद।

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