Anmol Vachan: पैसा, दौलत और ऐशो-आराम सब कुछ है, फिर भी क्यों जरूरी है भगवान का नाम?

राम-नाम का जाप पहाड़ जैसे कर्मों को कंकर में बदल सकता है?

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Anmol Vachan: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि आज के दौर में इन्सान भौतिकतावाद में बुरी तरह से उलझा हुआ है। ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब का नाम तो इन्सान भूल चुका है या यूं कहें कि इन्सान को मालिक का नाम जब जरूरत हो तब याद आता है। आगे-पीछे इन्सान भौतिकतावाद में बुरी तरह से उलझा हुआ है। 

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान वही बिजनेस, व्यापार करता है, जिसमें उसे लाभ हो। कोई भी यह सोचकर पैसा नहीं लगाता कि पैसा लगाऊं और वो डूब जाएं, बल्कि दोगुने-चौगुने के चक्कर में लोग रहते हैं। तो क्या राम-नाम का भी कोई फायदा है? इन्सान कहता है कि मेरे पास पैसा है, ऐशो-आराम है, साजो-सामान है, मैं भगवान का नाम क्यों लूं?

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि भगवान का नाम जितना लाभदायक है, उतना दुनिया में कोई और चीज हो नहीं सकती। चाहे आप अमीर हैं, चाहे गरीब हैं, ईश्वर का नाम हर किसी के लिए जरूरी है। जैसे मान लीजिए कि आने वाले टाईम में आपको कोई बहुत भयानक बीमारी लगने वाली है। आपको बहुत दर्द सहन करना पड़ेगा। उस बीमारी की वजह से आप सालों-साल चारपाई पर रहेंगे, लाखों रुपए खर्च हो जाएंगे और फिर शरीर जल्दी से तंदुरूस्त नहीं होता, समय लगता है।

क्या आपके पास कोई ऐसा टॉनिक है, जिसको ले लिया जाए और वो बीमारियां न लगें? जी नहीं, किसी भी पद्धति में ऐसा टॉनिक नहीं है। लेकिन ऐसा संभव हो सकता है कि आपको आने वाले रोग नहीं लगेंगे, सालो-साल जो चारपाई पकड़नी है, वो छूट जाएगी, लाखों-करोड़ों रुपए का खर्चा आना था, वो छूट जाएगा। क्या इससे बड़ा लाभ का सौदा कोई और हो सकता है? आप कहेंगे कि नहीं हो सकता, लेकिन ऐसा हो सकता है और वह होगा राम नाम की भक्ति के द्वारा। तो ये सौदा है राम-नाम की भक्ति। आप भक्ति करने का तरीका जान लो, उसका जाप करते रहो, काम-धन्धा करते रहो और जीभा, ख्यालों से सुमिरन करते रहो, तो किया गया जाप आपके आने वाले पहाड़ जैसे कर्म को कंकर में बदल देता है।

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