Anmol Vachan: पूज्य गुरु जी फरमाते हैं...इन्सान के जन्मों-जन्मों के पाप कब खत्म हो जाते हैं?

‘सतगुरु की याद में बैठने से मिलती हैं अलौकिक खुशियां’

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सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि यदि इन्सान सतगुरु, मौला के प्यार मोहब्बत की चर्चा, अल्लाह, गॉड, खुदा, रब्ब के प्यार की बात करे या उसकी याद में बैठता है तो उसे एक अलौकिक खुशी मिलती है, परमानंद मिलता है। चाहे वह वैराग्य में हो या खुशी में हो। इन्सान के जन्मों-जन्मों के पाप उस क्षण में खत्म हो जाते हैं। 

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि धन-दौलत के लिए, जमीन-जायदाद के लिए, हीरे-मोती लाल, जवाहारातों के लिए, बाल-बच्चों के लिए लोगों को तड़पते देखा है। पर कोई-कोई होता है जो मालिक के प्यार-मोहब्बत में तड़पा करता है। दुनिया के साजो-सामान के लिए इन्सान तड़पता है, वह तड़प कभी शांत नहीं होती और उस तड़प से तरह-तरह की बीमारियां, तरह-तरह के पाप पनपने लगते हैं। हालांकि मालिक की मोहब्बत में भी तड़प कभी समाप्त नहीं होती, लेकिन इन्सान जितना मालिक के लिए तड़पता है, जन्मों-जन्मों के पाप खत्म हो जाते हैं, समाज में रुतबा मिलता है और दोनों जहान में नाम अमर हो जाता है।

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि तड़प-तड़प में बहुत अंतर है। क्योंकि मालिक की याद में तड़पने से अपना ही नहीं अपने पूर्वजों का भी उद्धार हो जाता है। आने वाली कुलों का वह सहारा बन जाता है और गुजरी हुई कुलों को पार उतारा करने का जरिया बन जाता है। आप जी फरमाते हैं कि जब इन्सान सेवा सुमिरन करता हुआ मालिक से ओड निभा जाता है। जब वो जीवात्मा इस मृत्यु लोक को छोड़कर आगे प्रवेश करती है, पार ब्रह्म होने लगती है तो सब उसकी जय-जयकार करते हैं और वहां काल-महाकाल के दायरे में अटकी हुई रुहें, जोकि उनके पूर्वजों की होती हैं या किसी भी जूनी में हों उनकी भी मालिक मुक्ति कर देता है।

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