Anmol Vachan: एकमात्र ऐसी दवा जो तमाम टैंशनों को खत्म कर दे!
सुमिरन करने से मिलता है परमानंद: पूज्य गुरु जी
Anmol Vachan: सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr. Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि मालिक का नाम सुखों की खान है। इन्सान गम, दु:ख, दर्द, चिंता, परेशानियों में उलझा रहता है, जिसकी वजह से उसे तरह-तरह के रोग लग जाते हैं। इसकी एकमात्र दवाई जो तमाम टैंशनों को खत्म कर दे, हर तरह की बीमारी में आपको आत्मविश्वास दे, वो दवाई है राम-नाम, अल्लाह, वाहेगुरु की भक्ति। इन्सान कम से कम आधा-आधा घंटा सुबह-शाम नियमानुसार सुमिरन करे और ज्यादा चाहे जितना मर्जी करो। आप जितना सुमिरन करेंगे, उतना ही आपका शरीर, आपकी आत्मा बलवान होती चली जाएगी। गम, दु:ख, चिंताएं मिटती जाएंगी और परमानंद की प्राप्ति होनी शुरु हो जाएगी।
पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि परमानन्द का मतलब है कि परम+आनन्द। परम का मतलब है, जो सहने से भी परे हो, पर सहा जाए। आनन्द का मतलब है लज्जत, खुशी, स्वाद। संसार में दो तरह के स्वाद होते हैं, जिभा का स्वाद और इंद्रियों के भोग-विलास का स्वाद। जीभा का स्वाद यानि किसी को नमकीन, किसी को मीठा अच्छा लगता है। कोई इंद्रियों के भोग-विलास का आशिक है, उसी में खोया रहता है। हमेशा बुरी सोच दिमाग पर छाई रहती है। सोच, सोच तक रहे, इन्सान सुमिरन करे तो सोच का फल खत्म हो जाता है, लेकिन जब इन्सान सोच पर अमल करने लगता है, तो बेड़ा गर्क हो जाता है, उसके बर्बादी के दिन शुरु हो जाते हैं। लेकिन अगर आप सुमिरन करें, तो मालिक के नूरी स्वरूप के दर्शन होंगे, फिर जो परमानंद आएगा, जो दुनियावी स्वाद से अरबों-खरबों गुणा बढ़कर होगा और परमानेंट होगा।