मदरसे इस्लाम की रक्षा और प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम: मुफ्ती जावेद

मदरसे इस्लाम की रक्षा और प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम: मुफ्ती जावेद

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कैराना (सच कहूँ न्यूज़)। Kairana News: गांव मामौर स्थित मदरसा दारुल उलूम रहमानिया में छमाही परीक्षा के अवसर पर छात्रों का कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मौलाना मुफ्ती जावेद गढ़ी दौलत ने कहा कि मदरसे इस्लाम की शिक्षा, संरक्षण और प्रसार का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। यदि इस्लामी मदरसे नहीं होते तो आज हमारी मस्जिदों में इमाम कहां से आते, नमाज-ए-जनाजा कौन पढ़ाता, निकाह कौन कराता और नवजात बच्चों के कानों में अजान व इकामत कौन पढ़ता। मुफ्ती जावेद ने कहा कि मदरसों की वजह से ही मुसलमानों को अनेक धार्मिक सेवाएं बिना किसी शुल्क के उपलब्ध होती हैं। उन्होंने कहा कि मदरसों और मस्जिदों के बिना धार्मिक व्यवस्था अधूरी है।

मदरसों ने हर दौर में इस्लामी शिक्षा के प्रचार-प्रसार और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज भी बड़ी संख्या में उलेमा, इमाम, हाफिज और धार्मिक सेवाओं से जुड़े लोग मदरसों से शिक्षा प्राप्त कर समाज का मार्गदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने तब्लीगी जमात के गठन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आंदोलन की शुरुआत भी मदरसे से शिक्षा प्राप्त करने वाले प्रसिद्ध आलिम मौलाना इलियास रहमतुल्लाह अलैह ने की थी। इसके माध्यम से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में धर्म की दावत पहुंची। उन्होंने कहा कि उलेमा पैगंबरों के वारिस हैं, इसलिए अहले इल्म का सम्मान करना प्रत्येक मुसलमान की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोगों से उलेमा के बारे में बातचीत करते समय सावधानी बरतने और अपने ईमान की हिफाजत करने की अपील की। कार्यक्रम के समापन पर मौलाना मुहम्मद जाहिद कासमी ने दुआ कराई। इस दौरान मौलाना मुहम्मद साजिद, नूरुद्दीन प्रधान, हाफिज मुहम्मद नसीम, हाजी मुहम्मद कंवर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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