अवैध खनन रोकने के नाके ही सवालों के घेरे में, बाहरी लोगों की मौजूदगी पर उठे गंभीर सवाल

नाकों पर कथित अवैध वसूली के आरोप, एक बिल पर कई गाड़ियां दौड़ाने का भी आरोप; प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर उठी उंगली

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प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Pratap Nagar News: यमुनानगर जिले में अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन द्वारा बनाए गए नाके अब खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। खनन सामग्री से भरे वाहनों की निगरानी और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए लगाए गए इन नाकों पर बाहरी लोगों की मौजूदगी और कथित अवैध वसूली के आरोपों ने पूरी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस व्यवस्था का उद्देश्य अवैध खनन और अवैध परिवहन पर रोक लगाना है, उसी व्यवस्था में कथित तौर पर सेंध लगाकर नियमों को दरकिनार किया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि खनन क्षेत्र से जुड़े रास्तों पर लगाए गए कुछ नाकों पर विभागीय कर्मचारियों के बजाय निजी या बाहरी लोग बैठे दिखाई देते हैं। सवाल यह है कि इन लोगों को नाकों पर बैठने की अनुमति किस अधिकारी ने दी और उनकी जिम्मेदारी क्या है? यदि वे सरकारी कर्मचारी नहीं हैं तो उन्हें वाहनों की जांच अथवा आवाजाही पर नजर रखने का अधिकार किस आधार पर दिया गया है, इसकी जांच जरूरी है।

नाकों पर लेन-देन के आरोप

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि खनन सामग्री लेकर आने-जाने वाले कुछ वाहनों को रोककर दस्तावेजों की जांच के बजाय कथित तौर पर लेन-देन के आधार पर आगे जाने दिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन शिकायतों ने प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

इसके अलावा वाहनों की नंबर प्लेट बदलकर एक ही बिल या दस्तावेज के आधार पर कई वाहनों को निकालने के आरोप भी सामने आए हैं। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है, बल्कि खनन नियमों की निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर भी बड़ा सवाल खड़ा होगा।

फर्जी परचेज मामले ने बढ़ाई चिंता

कुछ दिन पहले यमुनानगर में फर्जी परचेज से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के मामले में प्रताप नगर पुलिस द्वारा मामला दर्ज किया गया था। इस मामले की जांच अभी जारी है। ऐसे में खनन क्षेत्र से जुड़े दस्तावेजों, बिलों और ई-रवाना रिकॉर्ड की गहन जांच की मांग और तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ही बिल पर कितने वाहनों की आवाजाही हुई, इसकी तकनीकी जांच से काफी कुछ स्पष्ट हो सकता है।

वहीं हाल में सीएम फ्लाइंग की कार्रवाई में एक अधिकारी के रिश्वत लेते पकड़े जाने की घटना ने भी खनन परिवहन की निगरानी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज कर दी है। आरोप है कि खनन सामग्री से भरे वाहनों को बिना रोक-टोक निकलने देने के लिए रिश्वत की मांग की गई थी। इस मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और सामने आने वाले तथ्यों से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

सीसीटीवी और रिकॉर्ड की जांच की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी खनन नाकों पर तैनात कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। साथ ही नाकों की सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रजिस्टर, वाहनों की एंट्री, रॉयल्टी और ई-रवाना दस्तावेजों का मिलान कराया जाए। यदि एक ही बिल पर कई वाहनों के निकलने की शिकायत सही है तो रिकॉर्ड से इसकी पहचान आसानी से की जा सकती है।

जिला खनन अधिकारी लोकेंद्र ने कहा कि नाकों पर बैठे प्राइवेट लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी और जो भी उचित कार्रवाई होगी, वह की जाएगी। उन्होंने कहा कि फर्जी परचेज मामले की जांच पुलिस कर रही है और जल्द ही मामले का समाधान होने की उम्मीद है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अवैध खनन रोकने के लिए बनाई गई व्यवस्था में यदि वास्तव में कोई गड़बड़ी है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी? निष्पक्ष जांच और नाकों के रिकॉर्ड की पड़ताल से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप महज शिकायत हैं या इनके पीछे कोई संगठित खेल चल रहा है।

 

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