2.5 करोड़ की लागत से मंडौर और 1 करोड़ रुपये से घमरौदा में सैनिटेशन कार्य शुरू
घमरौदा और मंडौर में गंदे पानी की समस्या का होगा समाधान
पटियाला (सच कहूँ/खुशवीर सिंह तूर)। Patiala News: पटियाला ग्रामीण में विकास कार्यों को नई रफ्तार देते हुए पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में गांव घमरौदा और मंडौर में सैनिटेशन तथा तालाबों के नवीनीकरण कार्यों का नींव पत्थर रखा। इस अवसर पर उनके साथ अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ग्रामीण विकास) दमनजीत सिंह मान और एसडीएम नाभा रविन्द्रपाल सिंह सोमल भी मौजूद थे। इसके अलावा डॉ. बलबीर सिंह ने गाँव हियाणा कलां में 24 घंटे बिजली सप्लाई की शुरूआत भी करवाई। उन्होंने बताया कि मंडौर में करीब 2.5 करोड़ रुपये और घमरौदा में 1 करोड़ रुपये की लागत से सैनिटेशन एवं तालाबों के नवीनीकरण के कार्य शुरू किए गए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गाँवों में गंदे पानी की समस्या को हल करने के साथ-साथ पानी को साफ करके इसका उचित पुन: उपयोग करने और गाँवों के पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। घमरौदा और मंडौर गाँवों में चल रहे विकास कार्यों का जिक्र करते हुए डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि दोनों गाँवों में गंदे पानी की समस्या लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। इसके समाधान के लिए आधुनिक सीवरेज ट्रीटमेंट प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसके तहत गंदे पानी को विभिन्न चरणों से गुजारकर साफ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि घमरौदा गाँव में सीवरेज के गंदे पानी की निकासी के कारण करीब साढ़े चार एकड़ क्षेत्र में गंदगी और बदबू की समस्या पैदा हो रही थी। अब यहाँ आधुनिक तकनीक के माध्यम से सीवरेज के पानी को ट्रीट करने के लिए चैंबर बनाए जा रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए आईआईटी रोपड़ की तकनीकी सहायता भी ली जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि इन प्रोजेक्टों को केवल गंदे पानी के निपटारे तक सीमित नहीं रखा जा रहा, बल्कि इन्हें मॉडल पर्यावरण पार्कों के रूप में विकसित करने की योजना है। इन स्थानों पर नानक बगीची, पौधरोपण, विरासती पेड़ों का संरक्षण और बटरफ्लाई पार्क जैसी गतिविधियां विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इन स्थानों पर पुरानी और विरासती किस्मों के पेड़ लगाने को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि गांँवों की प्राकृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सके। इसके साथ ही मनरेगा और अन्य उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से पौधरोपण और पार्कों के रखरखाव के लिए गाँव के लोगों को जोड़ा जाएगा, जिससे रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अधिकारी और ग्रामीण मौजूद थे।