Anmol Vachan: पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने हर परेशानी का हल एक ही बताया है, जानें क्या है वो?

''हर परेशानी का हल मालिक के नाम का सुमिरन है''

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सच्चे रूहानी रहबर पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां (Saint Dr Gurmeet Ram Rahim Singh Ji Insan) फरमाते हैं कि आदमी को हमेशा यही सोचना चाहिए कि हम सब एक हैं और एक ही मालिक के अंश हैं। ऐसा सोचकर कोई मालिक की भक्ति करता है तो उसके सारे गम, चिंता, परेशानी दूर हो जाती है क्योंकि हर परेशानी का हल मालिक के नाम का सुमिरन है। इन्सान को हमेशा मालिक का सुमिरन करना चाहिए। जिस तरह शरीर को मजबूत करने के लिए खुराक की जरूरत है उसी तरह जिस आत्मा के कारण शरीर जिंदा है उसकी खुराक के लिए भी इन्सान को कुछ करना चाहिए और वह खुराक केवल मालिक के नाम का सुमिरन ही है। प्रभु-सुमिरन ऐसी दवा है जिससे आत्मविश्वास आता है। इससे सारे गम, चिंता, परेशानी दूर हो जाती हैं। इसलिए संत सुमिरन करने की प्रेरणा देते हैं। Anmol Vachan

आप जी फरमाते हैं कि इन्सान सारा दिन काम-धन्धे करता है और रात को सपने में खो जाता है। दिन में इन्सान को ऐसा लगता है कि जो कुछ भी उसे नजर आ रहा है उसे अपना बना लूं, लेकिन न तो वो चाहत जो आदमी हद से ज्यादा करता है वो पूरी होती है और न ही जो सपने में नजर आता है वो अपना होता है। इस तरह मन ने इन्सान को भटका रखा है और इन्सान पैसे के लिए मारा-मारा फिरता रहता है तथा पैसे कमाने के लिए रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार, ठगी, बेईमानी करता है। 

आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को नेक कमाई के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए लेकिन किसी का हक मार कर नहीं खाना चाहिए। कहीं ऐसा न हो जाये कि किसी भक्त का कड़ा परिश्रम करके कमाया हुआ धन आप ठगी करके ले जाओ और जो आपके पास है उससे भी हाथ धो बैठो, क्योंकि हक-हलाल, मेहनत की कमाई अमृत के समान होती है। कोई दूसरा उस कमाई को हड़पता है तो उसे वो हजम नहीं होती और वो तड़पता रहता है। इसलिए इन्सान को कड़ा परिश्रम करके रोजी-रोटी खानी चाहिए और मन के बुरे विचारों से लड़ना चाहिए। इन्सान अगर मन से लड़ता हुआ मेहनत की रोजी-रोटी कमाकर खाता है और सेवा-सुमिरन में समय लगाता है तो मालिक की दया-दृष्टि के काबिल एक दिन जरूर बन जाता है। Anmol Vachan

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