Saint Dr. MSG Insan: क्या पाप में साथ देने वाला भी पाप का भागीदार बनता है?
क्या पाप में साथ देने वाला भी पाप का भागीदार बनता है?
सरसा। Saint Dr. MSG Insan: यह सवाल बहुत से लोगों के मन में आता है कि अगर कोई व्यक्ति गलत काम करता है और दूसरा उसका साथ देता है, तो क्या दोनों को बराबर का पाप लगता है?
इसका जवाब देते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम इन्सां फरमाते हैं कि जो व्यक्ति गलत काम करता है, वह तो अपने कर्म का जिम्मेदार होता ही है, लेकिन अगर कोई दूसरा व्यक्ति यह जानते हुए उसका साथ देता है, उसे गलत काम करने के लिए उकसाता है, उसकी मदद करता है या उसे बचाने की कोशिश करता है, तो वह भी उस पाप में शामिल माना जाता है।
लेकिन हर बार दोनों का पाप बिल्कुल बराबर हो, यह जरूरी नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस व्यक्ति की भूमिका क्या थी। जिसने जितना बड़ा और जितना जानबूझकर गलत काम किया होगा, उसकी जिम्मेदारी भी उतनी ही मानी जाएगी। उदाहरण के लिए, अगर कोई चोरी करता है और दूसरा व्यक्ति चोरी का सामान छिपाने में उसकी मदद करता है, तो दोनों गलत हैं। लेकिन जिसने चोरी की है और जिसने केवल उसकी मदद की है, दोनों की जिम्मेदारी एक जैसी हो, यह हर मामले में जरूरी नहीं है।
पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम इन्सां ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी पाप या गलत काम में किसी का साथ देता है, तो वह भी उस कर्म का भागीदार बनता है और उसे भी अपने कर्मों का फल मिलता है। लेकिन उसका दोष और फल उसकी भूमिका, नीयत और सहभागिता पर निर्भर करता है। इसलिए जीवन का सबसे बड़ा धर्म यही है कि हम स्वयं बुराई से दूर रहें और किसी भी प्रकार से गलत कार्य का समर्थन या सहयोग न करें। यही सच्चे धर्म, नैतिकता और मानवता का मार्ग है।
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