शिक्षा और रोजगार
India Global leadership: युवा शक्ति से 21वीं सदी में भारत का विश्व नेतृत्व, जानें देश की 5 बड़ी शक्तियां
बढ़ती आय, डिजिटल सेवाओं में वृद्धि ने अर्थव्यवस्था को आकर्षक बनाया
ईक्कीसवीं सदी किसी एक देश के प्रभुत्व की सदी नहीं होगी। दुनिया तेजी से ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जिसमें कई देश आर्थिक, सामरिक और तकनीकी शक्ति के प्रमुख केंद्र होंगे। ऐसे समय में भारत के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि वह विश्व की बड़ी शक्ति बन सकता है या नहीं, प्रश्न यह है कि वह अपनी शक्ति का उपयोग किस दिशा में करता है। भारत की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं, जिन्हें दूरदृष्टि और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ाया जाए तो देश विश्व नेतृत्व की मजबूत दावेदारी पेश कर सकता है। India Global leadership
भारत की पहली बड़ी शक्ति उसका लोकतांत्रिक अनुभव है। दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश होने के बावजूद भारत में नियमित चुनाव होते हैं और सत्ता का हस्तांतरण संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से होता है। स्वतंत्र न्यायपालिका, निर्वाचित संसद, राज्यों की अपनी सरकारें और सक्रिय नागरिक समाज लोकतांत्रिक व्यवस्था को आधार देते हैं। यह व्यवस्था चुनौतियों से मुक्त नहीं है। धनबल, जातीय राजनीति, सामाजिक असमानता, न्याय मिलने में देरी और संस्थाओं की जवाबदेही जैसे प्रश्न आज भी मौजूद हैं। इसलिए भारत के लिए लोकतंत्र की उपलब्धि पर संतुष्ट होकर रुकने के बजाय उसकी संस्थाओं को और मजबूत करना जरूरी है। ऐसा लोकतंत्र, जो नागरिकों को सम्मान, न्याय और अवसर दे, भारत की सबसे बड़ी शक्ति बन सकता है।
भारत की दूसरी विशिष्ट पहचान उसकी विविधता है। यहां अनेक भाषाएं, धर्म, परंपराएं, खान-पान और जीवन पद्धतियां साथ-साथ मौजूद हैं। इतनी विविधताओं के बीच राष्ट्रीय एकता बनाए रखना अपने आप में बड़ा अनुभव है। दुनिया के अनेक समाज आज बढ़ती सांस्कृतिक विविधता के साथ तालमेल बैठाने की चुनौती से गुजर रहे हैं। भारत का अनुभव उन्हें यह रास्ता दिखा सकता है कि अलग-अलग पहचान रखने वाले समुदाय समान अधिकारों और साझा नागरिकता की भावना के साथ साथ रह सकते हैं। इसके लिए सामाजिक सौहार्द और समान अवसर दोनों जरूरी हैं। विविधता तभी शक्ति बनती है, जब उसके भीतर न्याय और सम्मान का भाव बना रहे। India Global leadership
भारत की तीसरी बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। देश की आबादी में युवाओं की हिस्सेदारी काफी अधिक है, जबकि अनेक विकसित देशों में वृद्ध होती आबादी चिंता का विषय बन रही है। यह स्थिति भारत के लिए बड़ा अवसर है। पर युवा आबादी अपने आप आर्थिक शक्ति नहीं बनती। उसे अच्छी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगारपरक प्रशिक्षण और पर्याप्त रोजगार चाहिए। चिकित्सा सेवा, निर्माण, कृषि तकनीक, देखभाल, ऊर्जा, विनिर्माण और विज्ञान जैसे क्षेत्रों के लिए प्रशिक्षित भारतीय युवाओं की दुनिया भर में मांग बढ़ सकती है। यदि भारत शिक्षा और कौशल विकास को रोजगार की वास्तविक जरूरतों से जोड़ देता है तो उसका मानव संसाधन वैश्विक शक्ति का आधार बन सकता है।
भारत का विशाल घरेलू बाजार भी उसकी ताकत है। बढ़ती आय, डिजिटल सेवाओं का विस्तार और उपभोग में वृद्धि ने भारतीय अर्थव्यवस्था को आकर्षक बनाया है। वैश्विक कंपनियां उत्पादन के लिए चीन पर निर्भरता घटाकर दूसरे देशों में अवसर तलाश रही हैं। यह स्थिति भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। मगर इस अवसर को स्थायी सफलता में बदलने के लिए विश्वस्तरीय विनिर्माण, बेहतर परिवहन व्यवस्था, भरोसेमंद बिजली, सरल नियम, समय पर न्याय और स्थिर नीतियों की आवश्यकता होगी। देश में डिजिटल भुगतान, वस्तु एवं सेवा कर और उत्पादन बढ़ाने की योजनाओं ने आर्थिक ढांचे को बदलने में योगदान दिया है। अब चुनौती गुणवत्ता, उत्पादकता और निर्यात क्षमता बढ़ाने की है।
आज दुनिया के सामने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन, तकनीक और मानवीय मूल्यों के बीच सामंजस्य तथा राष्ट्रीय हित और वैश्विक जिम्मेदारी के बीच संतुलन जैसी चुनौतियां हैं। भारत अपने अनुभव से इन प्रश्नों पर एक संतुलित दृष्टि प्रस्तुत कर सकता है। किसी देश का विश्व नेतृत्व उसकी अर्थव्यवस्था या सैन्य शक्ति से ही तय नहीं होता। नेतृत्व तब सार्थक होता है, जब कोई देश अपनी शक्ति का उपयोग दूसरों के लिए समाधान प्रस्तुत करने में करे।
लोकतांत्रिक अनुभव, विविधता, युवा शक्ति, विशाल बाजार, शांति की परंपरा और समन्वयकारी दृष्टि भारत की महत्वपूर्ण पूंजी हैं। जरूरत इस बात की है कि इन क्षमताओं को नारे नहीं, नीतियों और परिणामों में बदला जाए। यदि भारत अपने भीतर मजबूत, समावेशी और न्यायपूर्ण समाज बना पाता है, तो इक्कीसवीं सदी में उसका विश्व नेतृत्व किसी महत्वाकांक्षा से अधिक एक स्वाभाविक संभावना बन सकता है। India Global leadership
डॉ. डी.के. गिरि (यह लेखक के अपने विचार हैं)।