बाढ़ राहत कार्यों में अनियमितताओं के आरोप, स्टेकों के बीच मिट्टी भरने पर उठे सवाल
तटबंध निर्माण में लापरवाही का आरोप, ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
प्रताप नगर (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Pratap Nagar News: मुजाफ़त कला, भगेड़ी, तिहानों, खानू वाला, रानीपुर और लाहड़ पुर सहित कई क्षेत्रों में चल रहे बाढ़ राहत एवं तटबंध निर्माण कार्यों को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से बनाए जा रहे पत्थरों के स्टेकों के बीच गुणवत्ता के अनुरूप सामग्री भरने के बजाय मिट्टी डाली जा रही है, जिससे निर्माण कार्यों की मजबूती पर संदेह पैदा हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन स्थानों पर नदी कटाव रोकने और बाढ़ से बचाव के लिए पत्थरों के बड़े-बड़े स्टेक लगाए गए हैं, वहां उनके बीच खाली जगहों में मिट्टी भर दी गई है। अब इन मिट्टी वाले हिस्सों में घास उगने लगी है, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि निर्माण में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि स्टेकों के बीच उचित तरीके से बोल्डर और मजबूत सामग्री भरी जाती, तो वहां घास उगने की स्थिति पैदा नहीं होती। गुरमेज सिंह, चमन लाल, जगबीर, बिन्दु, लक्की आदि ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले ही कई स्थानों पर स्टेक कमजोर दिखाई देने लगे हैं। लोगों को आशंका है कि तेज बारिश और नदी के बहाव के दौरान यह निर्माण कार्य बह सकते हैं, जिससे आसपास के गांवों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। स्थानीय किसानों ने बताया कि हर वर्ष बाढ़ और कटाव से उनकी कृषि भूमि प्रभावित होती है और इस बार राहत कार्यों से उन्हें उम्मीद थी, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने भी इस मामले में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्यों में मिलीभगत के चलते सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। कई ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन अधिकारियों या ठेकेदारों की लापरवाही सामने आए, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
लोगों का कहना है कि सरकार बाढ़ राहत कार्यों पर हर साल लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करती है ताकि नदी किनारे बसे गांव सुरक्षित रह सकें, लेकिन यदि निर्माण कार्यों में ही अनियमितता बरती जाएगी तो इसका सीधा खामियाजा जनता को भुगतना पड़ेगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भेजकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फिलहाल संबंधित विभाग के अधिकारियों की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते जांच और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आगामी बरसात में बड़े नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
सिंचाई विभाग के सुप्रीडेंट इंजीनियर प्रवीण गुप्ता का कहना है कि यदि स्टॉक के बीच में मिट्टी मिलाई जा रही है और पत्थर का साइज छोटा हुआ तो वे संबंधित अधिकारी को भेजकर जांच करवाते है।

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