नूंह के सरकारी स्कूल दिन में पाठशाला रात में पशुशाला!
सरकारी स्कूलों की बदहाली पर हरियाणा मानवाधिकार आयोग गंभीर
नूंह/गुरुग्राम Nuh/Gurugram (संजय कुमार मेहरा)। नूंह...वैसे तो यह जिला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आता है। वहां के विकास को लेकर सरकारों ने सदा बड़े-बड़े दावे और वायदे किए हैं। विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में इलाका काफी पिछड़ा ही रहता है। अब वहां के सरकार स्कूलों की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सबको हैरान कर देने वाली है। सरकारी स्कूल दिन में तो पाठशाला होते हैं और रात होते-होते पशुशाला में तब्दील हो जाते हैं। सरकारी स्कूलों की ऐसी बदहाली पर हरियाणा के मानवाधिकार आयोग (Haryana Human Rights Commission) ने हैरानगी जाहिर करते हुए इस पर रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि-नूंह में स्कूल हैं या पशुशाला। Gurugram News
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने जिला नूंह के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों की अत्यंत चिंताजनक एवं अमानवीय स्थिति पर गंभीर रुख अपनाते हुए स्वत: ही संज्ञान लिया है। आयोग ने कहा है कि यह स्थिति बेहद ही दर्दनाक है। बच्चे असुरक्षित कमरों में पढ़ाई करते हैं। यह बच्चों के शिक्षा के अधिकार, स्वास्थ्य के अधिकार तथा गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का प्रत्यक्ष उल्लंघन नजर आ रहा है। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा तथा सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया के समक्ष आए तथ्यों के अनुसार जिला नूंह के फिरोजपुर झिरका क्षेत्र में कई सरकारी प्राथमिक विद्यालय बिना भवनों के संचालित हो रहे हैं।
पशुशाला में चल रहा है कुबड़ा बास गांव का स्कूल
राजकीय प्राथमिक विद्यालय गांव कुबड़ा बास कथित रूप से एक पशुशाला में चलाया जा रहा है। वहां 29 छात्र एवं 33 छात्राएं बाल वाटिका से कक्षा तीसरी तक के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। विद्यालय का समय खत्म होने के बाद उसी परिसर में गाय एवं भैंस बांधी जाती है। पशुओं का चारा भी वहीं रखा जाता है। सफाई के बावजूद परिसर में दुर्गंध आती रहती है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य एवं अध्ययन वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह भी बताया गया है कि विद्यालय केवल एक निजी भूमि के मालिक द्वारा दी गई अस्थायी अनुमति के कारण संचालित हो रहा है, जो कि स्थायी सरकारी भवन के अभाव को दर्शाता है। यह विद्यालय भी उन 19 विद्यालयों में से एक है जो गुरुग्राम से सटे हरियाणा के इस जिले में बिना भवन के संचालित हो रहे हैं। Gurugram News
गांव कालू बास के स्कूल में पेड़ों से बांधे जाते हैं ब्लैक बोर्ड
इसी प्रकार गांव कालू बास का राजकीय प्राथमिक विद्यालय खुले मैदान में संचालित हो रहा है। वहां 45 लडक़ों और 50 लड़कियों को पेड़ों से बंधे ब्लैक बोर्ड के सामने पढ़ाया जा रहा है। मानसून के दौरान पूरा मैदान कीचड़ में तब्दील हो जाता है। सर्दियों में बच्चों को अत्यधिक ठंड जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे शिक्षा का वातावरण अत्यंत असुरक्षित बन जाता है। आयोग का मानना है कि ऐसी परिस्थितियां बच्चों की सुरक्षा के साथ गंभीर समझौते के समान हैं।
गांव कुबड़ा बास में नियुक्त एक सरकारी शिक्षक ने स्थिति को दर्दनाक बताते हुए कहा कि वह बच्चों को एक असुरक्षित कमरे में पढ़ाने के लिए विवश हैं, जहां मानसून के दौरान चारों ओर से वर्षा का पानी टपकता है। गर्मियों में अत्यधिक गर्मी के कारण कक्षाओं का संचालन भीतर करना लगभग असंभव हो जाता है। विद्यालय भवन निर्माण के लिए चिन्हित पंचायत भूमि कथित रूप से ग्राम रावली में स्थित है, जो लगभग साढ़े तीन किलोमीटर दूर है। यह भी छोटे बच्चों के लिए व्यावहारिक नहीं है। हरियाणा मानवाधिकार आयोग की ओर से नूंह के उपायुक्त, जिला शिक्षा अधिकारी से मांगी गई है।
दूर से आने वाले शिक्षकों ने छोड़ी नौकरी
आयोग ने इस बात पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है कि शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए हरियाणा कौशल रोजगार निगम के माध्यम से संविदात्मक शिक्षकों की नियुक्ति बहादुरगढ़, रेवाड़ी एवं महेंद्रगढ़ जैसे दूरस्थ जिलों से की गई। रिपोर्ट के अनुसार, कई शिक्षकों ने लंबी दूरी एवं मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण नौकरी छोड़ दी। हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने अपने आदेश में कहा कि बच्चों को पशुशालाओं, खुले मैदानों अथवा जर्जर ढांचों में पढ़ाना न केवल बच्चों के मानवाधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि यह बालकों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों का भी उल्लंघन है।
नियम के अनुसार प्राथमिक विद्यालय आबादी से एक किलोमीटर के भीतर स्थित होना चाहिए। आयोग ने कहा है कि वर्तमान प्रकरण जिला नूंह में बच्चों के बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा में गंभीर विफलता को दर्शाता है। इसके लिए तत्काल हस्तक्षेप एवं सुधारात्मक कार्रवाई आवश्यक है। आयोग के असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि उपरोक्त सभी सम्बंधित अधिकारियों को ने आदेश में उल्लिखित बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई की तारीख 22 जुलाई 2026 से एक सप्ताह पूर्व हरियाणा मानव अधिकार आयोग के सामने प्रस्तुत करनी है। Gurugram News