ऊंचे पद, बड़ा तनाव: क्यों टूट रहे हैं देश के अधिकारी मानसिक दबाव के बोझ तले?
वरिष्ठ अधिकारियों की आत्महत्या के मामलों ने बढ़ाई चिंता
पानीपत (सच कहूँ/सन्नी कथूरिया)। Suicide Case: हाल के समय में देश में न्यायिक सेवा, आईपीएस सहित कई वरिष्ठ पदों पर कार्यरत अधिकारियों द्वारा आत्महत्या के दुखद मामले सामने आए हैं। यह घटनाएँ न केवल प्रशासन बल्कि समाज के लिए भी गहन चिंता और आत्मचिंतन का विषय हैं।
मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
ऐसे मामलों में अक्सर अत्यधिक कार्यभार, निरंतर तनाव, निर्णय लेने का दबाव, भावनात्मक अलगाव और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान न देना प्रमुख भूमिका निभाते हैं। कोई भी व्यक्ति, चाहे पद कितना भी ऊँचा हो, मानसिक तनाव और अवसाद से अछूता नहीं रहता। मानसिक स्वास्थ्य को ‘कमजोरी’ मानने की धारणा ही सबसे बड़ा खतरा है।
संवेदना और अपील
1. सहायता लेना कमजोरी नहीं: तनाव, चिंता, नींद न आना या निराशा महसूस होने पर मनोवैज्ञानिक या मनोचिकित्सक से परामर्श करें। समय पर बातचीत जीवन बचा सकती है।
2. सहकर्मी और परिवार की भूमिका: आसपास के लोगों के व्यवहार में बदलाव को पहचानें। किसी को अकेला न छोड़ें और बिना जज किए सुनें।
3. कलंक तोड़ें: मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर खुलकर बात करें। इसे छुपाना या दबाना स्थिति को और गंभीर बना देता है।
सहायता के लिए संपर्क
अगर आप या आपका कोई जानने वाला मानसिक तनाव से गुजर रहा है, तो तुरंत पेशेवर मदद लें:
मनोवैज्ञानिक की सलाह
व्यवसायिक जीवन में संतुलन, नियमित ब्रेक, माइंडफुलनेस और भावनात्मक अभिव्यक्ति को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। संस्थाओं को भी अधिकारियों के लिए अनिवार्य मानसिक स्वास्थ्य स्क्रीनिंग, काउंसलिंग और रेजिलिएंस ट्रेनिंग को नीति में शामिल करना चाहिए।
