मंडी में पहुँचने से पहले खेतों में ही बिक रही धान, जाने क्या है कारण?

कटाई के बाद सीधे फैक्ट्रियों में पहूँच रही धान

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रानियां (सच कहूँ/राजेंद्र गाबा)। जिस समय धान की खरीद को लेकर मंडियों में किसानों की भीड़ होनी चाहिए, रानियां में तस्वीर उलट है। यहां धान मंडी तक पहुंचने से पहले ही खेतों में बिक रहा है। खासकर परमल की पीआर-14 किस्म की खड़ी फसल के सौदे खेतों में हो रहे हैं। करनाल, कैथल और तरावड़ी के व्यापारी किसानों के खेतों तक पहुंच रहे हैं और कटाई के साथ ही धान सीधे दूसरे जिलों की फैक्ट्रियों में भेजा जा रहा है। ऐसे में रानियां मंडी में न तो पीआर-14 की अपेक्षित आवक दिख रही है और न ही सरकारी खरीद का असर। खेत से सीधे खरीद की इस व्यवस्था ने मंडी शुल्क और सरकारी राजस्व की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

किसानों को 2,500 रुपये तक खेत में ही मिल रहा धान का भाव

रानियां क्षेत्र में पीआर-14 की कटाई शुरू हो चुकी है। मजबूत मांग के चलते व्यापारी खेत में ही फसल का सौदा कर रहे हैं। किसानों को करीब 2,500 रुपये प्रति क्विंटल तक भाव मिलने की बात सामने आ रही है। खास बात यह है कि धान अधिक नमी और बिना सफाई के भी खेत से खरीदा जा रहा है। भाव अच्छा मिलने के कारण किसान फसल मंडी में लाने की बजाय खेत से ही सौदा करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। कटाई के बाद यही धान रानियां मंडी में आए बिना करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र क्षेत्र की फैक्ट्रियों में भेजा जा रहा है। इससे मंडी में परमल की आवक बेहद कम नजर आ रही है।

खेत में सौदा, दूसरे जिलों में सप्लाई, मंडी शुल्क की निगरानी चुनौती

खेत से सीधे खरीद और दूसरे जिलों की फैक्ट्रियों तक धान पहुंचने की स्थिति ने मंडी व्यवस्था की निगरानी को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। मंडी में खरीद-बिक्री नहीं होने पर मंडी शुल्क और उससे जुड़े राजस्व की वसूली पर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि खेतों में हो रहे इन सौदों का रिकॉर्ड किस स्तर पर दर्ज हो रहा है और दूसरे जिलों में जा रही फसल की खरीद-बिक्री पर संबंधित विभाग की निगरानी किस तरह हो रही है।

1509 का बाजार धड़ाम, एक दिन में 200 रुपये तक गिरा भाव

जहां पीआर-14 खेतों में हाथों-हाथ बिक रही है, वहीं 1509 धान रानियां मंडी में मंदे की चपेट में है। एक दिन में इसके भाव में करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल तक की गिरावट आई। एक दिन पहले 4,470 रुपये प्रति क्विंटल तक बिकने वाली ढेरी अगले दिन 4,270 रुपये तक आ गई, इसके बावजूद खरीदार नहीं मिला। अधिकांश ढेरियों के भाव 4,100 से 4,200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहे। व्यापारियों के अनुसार चावल के भाव में करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट का असर 1509 पर पड़ा है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले इसके भाव अभी भी बेहतर बताए जा रहे हैं।

पिछले साल मंडी में भर गया था परमल, इस बार खेत से ही निकल रही फसल

पिछले वर्ष इन्हीं दिनों रानियां अनाज मंडी में परमल की आवक बढ़ गई थी। किसानों को करीब 2,000 से 2,100 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिल रहा था और वे सरकारी खरीद शुरू होने का इंतजार कर रहे थे। इस बार करीब 2,500 रुपये प्रति क्विंटल का भाव खेत में ही मिलने के कारण किसान मंडी का रुख नहीं कर रहे हैं। सरकार ने परमल की खरीद 29 सितंबर से शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन रानियां मंडी में पर्याप्त आवक नहीं होने से सरकारी खरीद की तस्वीर फिलहाल अलग नजर आ रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आने वाले दिनों में किसान अपनी फसल मंडी तक लाएंगे या खेतों से सीधे दूसरे जिलों में जाने वाली धान की यह व्यवस्था ही जारी रहेगी?

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