कीटनाशक विक्रेताओं ने दुकानें बंद रखकर जताया रोष

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सरसा (सच कहूँ न्यूज)। Sirsa News: बीज व कीटनाशक विक्रेताओं ने सोमवार को कीटनाशक और बीज (हरियाणा संशोधन) विधेयक, 2025 लागू करने के विरोध में अपने प्रतिष्ठानों पर बेमियादी हड़ताल रखी। बीज व कीटनाशक विक्रेताओं के संगठन के प्रधान राधे गांधी व सीड प्रोडयूसर एसोसिएशन के प्रधान अनिल कालड़ा ने कहा कि यह कानून अव्यवहारिक और असंगत हैं। इससे व्यापार करना नामुमकिन हो जाएगा। सरकार से बार-बार बातचीत की कोशिश नाकाम रहीं। मजबूर होकर अब व्यापारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा है। Sirsa News

उन्होंने बताया कि सरसा शहर में 300, जिले में 3622 जबकि पूरे प्रदेश में लगभग 30 हजार बीज व कीटनाशक विक्रेता हड़ताल पर हैं। अनाज मंडी के सामने काफी संख्या इकट्ठे होकर बीज व कीटनाशक विक्रेताओं ने कहा कि अभी तो यह हड़ताल पूरे प्रदेश में है यदि सरकार ने यह कानून वापस नहीं लिया तो इस हड़ताल का विस्तार पूरे देश में भी किया जा सकता है।

किसान की गलती का खामियाजा क्यों भुगते विक्रेता?

बीज व कीटनाशक विक्रेताओं ने प्रधान राधे गांधी ने बताया कि इस नए कानून के अनुसार यदि कोई किसान बीज रोपने में गलती करता है या बिजाई के मानदंडों में कोई ढिलाई करता है और फसल के खराब होने की शिकायत करता है तो इसके लिए विक्रेताओं को आरोपी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस कानून में कृषि विभाग के अधिकार पुलिस को देना बीज व कीटनाशक विक्रेताओं के साथ अन्याय है। Sirsa News

इसके अलावा भी नए कानून में दवा व कीटनाशक उत्पादकों को द्वितीय आरोपी बनाए जाने का प्रावधान किया गया है जबकि इस कानून की पहली गाज विक्रेताओं पर पड़ेगी। उन्होंने बताया कि यदि विक्रेताओं ने डर के कारण स्टॉक कम रखा तो उत्पादों की कीमतें बढ़ जाएगी और किसानों को अच्छे बीज और कीटनाशक महंगे दामों पर खरीदने पड़ सकते हैं।

सरकार व विक्रेताओं की तनातनी से किसान मुश्किल में | Sirsa News

प्रदेश में हड़ताल को देखते हुए कई किसान सीमावर्ती प्रदेशों के विक्रेताओं से बीज व कीटनाशक खरीद सकते हैं। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए कई कीटनाशक उत्पादकों ने सीमावर्ती प्रदेश के विक्रेताओं को निर्देश जारी किए हैं कि वे हरियाणा प्रदेश के किसान को बीज न बेचें। यदि किसी किसान को बीज व कीटनाशक बेचा गया तो इसकी जिम्मेदारी उत्पादकों की नहीं होगी।

उल्लेखनीय है कि यह कानून केवल हरियाणा प्रदेश में लागू किया गया है जबकि सीमावर्ती प्रदेशों में ऐसा कोई कानून नहीं है। गेहूं की कटाई के बाद खरीफ सीजन की बुआई नजदीक है। अगर बीज-पेस्टीसाइड विक्रेताओं की हड़ताल जारी रही तो किसानों को संकट का सामना करना पड़ सकता है। जल्द समाधान नहीं निकाला, तो यह आंदोलन न सिर्फ व्यापार बल्कि खेती और किसानी को भी प्रभावित करेगा।

कानून वापिस ले सरकार: गर्ग

अखिल भारतीय व्यापार मंडल के राष्ट्रीय मुख्य महासचिव बजरंग गर्ग ने बीज उत्पादक, पेस्टिसाइड्स निमार्ता, खाद्य, बीज, कीटनाशक दवाई के विक्रेताओं के व्यापारियों बातचीत करने उपरांत कहा कि सरकार द्वारा व्यापारियों पर 6 महीने से 3 साल तक की सजा का जो कानून बनाया है। उस पर भारी नाराजगी जताई। गर्ग ने कहा कि व्यापार मंडल इस कानून घोर निंदा करता है। अगर सरकार ने व्यापारियों को सजा देने का कानून वापिस नही किया तो व्यापार मंडल हरियाणा बंद की आह्वान करेगा और सरकार के फैसले के खिलाफ सड़कों पर उतरकर जोरदार अंदोलन करेगा।

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