एसडीएम कार्यालय के कर्मचारी को भारी पड़ा गबन, तीन साल खाएगा जेल की हवा

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वाहन पंजीकरण के 20 लाख रुपये लेकर भागा था

गुरुग्राम (सच कहूँ न्यूज)। एसडीएम सतीश यादव के कार्यालय के एक कर्मचारी को 20 लाख रुपये के गबन मामले में अदालत ने तीन साल की सजा व 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। पुलिस ने आरोपी कर्मचारी को कर्नाटक के मैसूर से काबू किया। वाहन पंजीकरण क्लर्क अजय ने वाहन पंजीकरण की फीस जमा कराने के लिए 16 मार्च 2016 को योगेंद्र को बैंक में भेजा था। 16, 17 व 18 मार्च को सरकारी फीस जमा कराने के लिए भेजने के बाद योगेंद्र ने कहा कि बैंक का सर्वर डाउन है। 21 मार्च को 20.69 लाख रुपये लेकर योगेंद्र को फिर से बैंक भेजा गया। (Gurugram News)

सुबह 11 बजे एसडीएम कार्यालय (SDM Office) से निकले योगेंद्र से कार्यालय के किसी भी कर्मचारी का संपर्क नहीं हो सका। ना ही उसने वह रकम जमा कराई। एसडीएम कार्यालय की तरफ से थाना शहर की पुलिस चौकी खांडसा रोड को योगेंद्र के गायब होने की शिकायत दी गई। 22 मार्च को थाना शहर पुलिस ने योगेंद्र के खिलाफ तत्कालीन एसडीएम (साउथ) सतीश यादव की शिकायत पर गबन का मामला दर्ज कर लिया।

31 मार्च 2016 को योगेंद्र के पिता मेदराम ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा 21 मार्च से गायब है। बेटे के दोस्त की माँ ने सात लाख रुपये सरकारी फीस एक्सिस बैंक में जमा करा दिए हैं। इसके बाद पुलिस ने 11 अप्रैल को आरोपी योगेंद्र को कर्नाटक के मैसूर शहर से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी के घर से 2 लाख रुपये और रेवाड़ी के गांव ततारपुर से 11.69 लाख बरामद किए थे।

आरोप तय होने के बाद मांगी थी सजा में माफी | (Gurugram News)

योगेंद्र ने खुद पर आरोप तय होने के बाद ज्यूडिशल मजिस्ट्रेट विक्रांत की अदालत से सजा में माफी की मांग की थी। इसके लिए उसने बुजुर्ग माँ-बाप का हवाला दिया। अदालत में यह भी प्रमुखता से कहा गया कि यह मामला सरकारी पैसे के गबन का है। इसलिए सजा में छूट देना उचित नहीं। अदालत ने सबूत और गवाहों के आधार पर योगेंद्र को तीन साल की सजा सुनाई। इसके साथ ही 10 हजार जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा होगी।

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