राष्ट्रपति के मुलाकात का समय नहीं मिलने पर अमरिंदर देंगे राजघाट पर धरना

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चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। राष्ट्रपति से मुलाकात का समय नहीं मिलने पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मंगलवार से दिल्ली के राजघाट पर सांकेतिक धरना देने का ऐलान किया है। कैप्टन सिंह ने मंगलवार को जारी एक वक्तव्य में कहा कि वह राजघाट पर विधायकों के साथ धरने पर बैठेंगे ताकि रेल मंत्रालय द्वारा राज्य में मालगाड़ियों के आवागमन की अनुमति न दिए जाने के कारण उत्पन्न बिजली संकट और आवश्यक वस्तुओं की स्थिति गम्भीर होने की ओर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि राज्य में मालगाड़ियां स्थगित किये जाने के कारण पैदा हुआ संकट गहराता जा रहा है जिसके कारण सभी ताप विद्युत संयंत्र बंद हो गये हैं तथा साथ ही कृषि और सब्जियों की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में निषेधाज्ञा लागू होने के मद्देनजर राज्य के विधायक पंजाबभवन से चार-चार के जत्थों में राष्ट्रपिता की समाधि पर जाएंगे। वह स्वयं भी सुबह 10.30 बजे धरने का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने अन्य राजनीतिक दलों से भी राज्य के हितों को देखते हुए इन धरनों में हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि विधानसभा के विशेष सत्र के तुरंत बाद सभी राजनीतिक दलों ने सर्वसम्मति से कृषि विधेयकों के मुद्दे पर राष्ट्रपति के हस्तक्षेप के लिए उनसे मुलाकात चार नवम्बर को समय मांगा था। इस सम्बंध में मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी गत 21 अक्तूबर को राष्ट्रपति भवन को पत्र भेजकर मुलाकात का समय माँगा था। 29 अक्तूबर को फिर से ज्ञापन भेजा गया जिसके जवाब में मुख्यमंत्री कार्यालय को गत दिन प्राप्त हुए अर्द्धसरकारी पत्र में मुलाकात के अनुरोध को इस आधार पर अस्वीकार कर दिया गया है कि प्रांतीय संशोधन विधेयक अभी राज्यपाल के पास ही विचार हेतु लम्बित पड़े हैं।
इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से गत दिन भेजे गए एक अन्य पत्र में कहा गया है कि मुख्यमंत्री और अन्य विधायकों को मौजूदा स्थिति राष्ट्रपति के ध्यान में लाने और मुद्दों के समाधान के लिए उनसे मिलने के लिए समय देने की जरूरत है जिस पर राष्ट्रपति कार्यालय ने जवाब में कहा है‘पहले कारणों के संदर्भ में इस समय पर यह विनती स्वीकार नहीं की जा सकती। कैप्टन सिंह ने कहा कि राज्य की स्थिति बेहद गंभीर है क्योंकि किसानों के मालगाड़ियां का आवागमन न रोकने के फैसले के बावजूद भी रेलवे की ओर से मालगाड़ियों का संचालन शुरू न किये जाने से राज्य के पास कोयला, यूरिया/डी.ए.पी. खाद और अन्य जरूरी वस्तुएँ खत्म हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आज बिजली खरीद की इसकी बोली को इजाजत न मिलने के कारण राज्य को बिजली की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है और इसके साथ ही कृषि गतिविधियां, सब्जियों, रसोई गैस तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी बुरी तरह से प्रभावित हुई है।

 

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