टिब्बी नहर हादसा: 40 घंटे बाद मिले दोनों किशोरों के शव, पोस्टमार्टम में देरी से परिजनों में रोष
इंदिरा गांधी फीडर नहर में डूबे दो किशोरों के शव मिले
टिब्बी (सच कहूँ/अंकित वधवा)। Tibbi News: राजस्थान-हरियाणा सीमा पर स्थित सूरेवाला के पास इंदिरा गांधी फीडर (राज कनाल) नहर में नहाते समय डूबे हरियाणा के सिरसा जिले के गांव बणी निवासी दो किशोरों के शव करीब 40 घंटे तक चले सघन सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शनिवार सुबह बरामद कर लिए गए। इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे बणी गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। वहीं शवों के पोस्टमार्टम में हुई देरी को लेकर परिजनों और ग्रामीणों में नाराजगी भी देखने को मिली।
जानकारी के अनुसार, गुरुवार 4 जून को भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए बणी गांव के 7 से 10 किशोर राजस्थान सीमा क्षेत्र में स्थित सूरेवाला के पास इंदिरा गांधी फीडर नहर में नहाने पहुंचे थे। दोपहर करीब 12 बजे नहाने के दौरान 14 वर्षीय मनीष पुत्र राजकुमार वाल्मीकि और 16 वर्षीय मोहित पुत्र रोहिताश वाल्मीकि गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आ गए। साथियों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन देखते ही देखते दोनों नहर में बह गए। अन्य साथी किसी तरह सुरक्षित बाहर निकल आए और गांव पहुंचकर परिजनों को घटना की जानकारी दी।
सूचना मिलते ही टिब्बी पुलिस, हरियाणा पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों तथा गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंची। टिब्बी पुलिस थानाधिकारी हंसराज लूणा के नेतृत्व में राजस्थान और हरियाणा पुलिस ने संयुक्त रूप से सर्च अभियान शुरू किया। नहर के तेज बहाव और गहराई के कारण राहत एवं बचाव कार्य में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। गोताखोरों ने कई किलोमीटर तक नहर में तलाश की, लेकिन शुक्रवार देर शाम तक दोनों किशोरों का कोई सुराग नहीं मिल पाया। अंधेरा होने के बाद अभियान को अस्थायी रूप से रोका गया और शनिवार सुबह पुनः शुरू किया गया।
करीब 40 घंटे की लगातार मशक्कत के बाद शनिवार सुबह दोनों किशोरों के शव नहर से बरामद कर लिए गए। शवों को टिब्बी के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की मोर्चरी में रखवाया गया, जहां पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू की गई। शव मिलने की सूचना के बाद बणी गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर फैल गई और बड़ी संख्या में परिजन एवं ग्रामीण अस्पताल पहुंच गए।
दोनों मृतक किशोर अपने-अपने परिवारों के इकलौते सहारे थे। मोहित ने आर्थिक तंगी के चलते दसवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी थी और शादियों में वेटर का काम करने के साथ दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार की मदद करता था। उसके पिता भी मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वहीं 14 वर्षीय मनीष के पिता का पहले ही निधन हो चुका था। वह अपनी विधवा मां, बहन और दादी का इकलौता सहारा था। सातवीं कक्षा तक पढ़ाई करने के बाद उसने घर की आर्थिक स्थिति को देखते हुए एक दुकान पर काम करना शुरू कर दिया था और परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटा रहा था।
शनिवार सुबह करीब 8 बजे शवों को अस्पताल लाए जाने के बाद पोस्टमार्टम प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार किया जाता रहा। भीषण गर्मी और उमस के बीच बड़ी संख्या में परिजन और ग्रामीण अस्पताल परिसर में मौजूद रहे। इस दौरान पोस्टमार्टम में हुई देरी को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। उनका आरोप था कि आवश्यक औपचारिकताओं और मेडिकल बोर्ड की प्रक्रिया के कारण अपेक्षा से अधिक समय लग गया, जिससे पीड़ित परिवारों को मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ा।
वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नाबालिगों की मृत्यु के मामलों में नियमानुसार मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम कराया जाता है और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होता है, जिसके कारण कुछ समय लगना स्वाभाविक है।
गांव के सरपंच प्रतिनिधि संजीव ने बताया कि दोनों किशोर वाल्मीकि समाज से संबंध रखते थे और आपस में घनिष्ठ मित्र थे। वे कम उम्र में ही अपने परिवारों की जिम्मेदारियां संभाल रहे थे। उनके असामयिक निधन से पूरे गांव में गहरा दुख और मातम का माहौल है।
प्रशासन की ओर से नहरों में नहाने पर पहले से प्रतिबंध और चेतावनियां जारी की गई थीं, इसके बावजूद किशोर नहर में उतर गए। इस दर्दनाक हादसे ने दो परिवारों के चिराग बुझा दिए और पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने दोनों शव परिजनों को सौंप दिए, जिसके बाद गांव में गमगीन माहौल के बीच उनका अंतिम संस्कार किया गया।
