भिवानी के हनुमान ढाणी क्षेत्र में पेयजल का संकट गहराया, टैंकरों का दूषित पानी पीने से फैल रही बीमारियां
निवासी बोले: 13 वर्षों से खारे पानी और बीमारियों के साए में जीने को मजबूर, प्रशासन मौन
भिवानी (सच कहूँ/इंद्रवेश)। Bhiwani News: बढ़ती गर्मी और चढ़ते पारे के साथ ही भिवानी शहर में पेयजल का संकट गहराता जा रहा है। भिवानी शहर के हनुमान ढाणी क्षेत्र में तो स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि स्थानीय लोग बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि यह समस्या कोई दो-चार दिनों या महीनों की नहीं, बल्कि पिछले 13 वर्षों से लगातार बनी हुई है।
हर साल मार्च का महीना शुरू होते ही यहां के लोगों की धड़कनें बढ़ जाती हैं और अक्टूबर तक उन्हें पानी के लिए एक-एक दिन संघर्ष करना पड़ता है। प्रशासनिक उपेक्षा से तंग आ चुके क्षेत्रवासियों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। पानी की किल्लत और अधिकारियों की लापरवाही के खिलाफ स्थानीय जनता ने अब तीखा रोष प्रकट करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि विभाग की तरफ से कभी-कभार ही कोई सरकारी पानी का टैंकर भेजा जाता है। जब हफ्तों बाद एक टैंकर आता है, तो पूरा मोहल्ला बाल्टियाँ और डिब्बे लेकर उस पर टूट पड़ता है।
पानी कम और लेने वाले ज्यादा होने के कारण आए दिन टैंकर पर महिलाओं और पड़ोसियों के बीच आपसी झगड़े और सिर-फुटौव्वल की नौबत आ जाती है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि प्रशासन नियमित रूप से टैंकर भेजने की बजाय सिर्फ खानापूर्ति कर रहा है। स्थानीय निवासियों ने कहा कि वे पेयजल समस्या के स्थायी समाधान की मांग को लेकर पिछले कई सालों में दर्जनों बार जनस्वास्थ्य विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं।
मार्च से अक्टूबर तक साफ पानी नसीब नहीं होता
पेयजल समस्या से परेशान हनुमान ढाणी के निवासियों बबली, प्रताप सैनी, राधेश्याम, जानकी, पुष्पा व अन्य ने अपना दुखड़ा रोते हुए कहा कि क्षेत्र में जमीनी पानी बेहद खारा है, जिसे पीना तो दूर, कपड़े धोने या नहाने के काम में भी नहीं लाया जा सकता। ऐसे में पूरा इलाका पूरी तरह से बाहरी सप्लाई या टैंकरों पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि पिछले 13 साल से हमारे साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। मार्च से अक्टूबर तक हमें पीने लायक साफ पानी भी नसीब नहीं होता। मजबूरन हमें महंगे दामों पर निजी टैंकरों का पानी खरीदना पड़ता है।
वह पानी किस स्रोत का है, साफ है या नहीं, हमें नहीं पता। उस टैंकर के पानी का इस्तेमाल करने की वजह से हमारे बच्चे और बुजुर्ग लगातार पेट, त्वचा और अन्य गंभीर बीमारियों से घिर रहे हैं। कमाई का बड़ा हिस्सा डॉक्टरों की फीस और दवाइयों में जा रहा है।