जब मेहनत और हिम्मत ने तराशा तो खदान से हीरा बनकर निकली बूंदी शहर की बेटी डॉ दीक्षा भारद्वाज
जब मेहनत और हिम्मत ने तराशा तो खदान से हीरा बनकर निकली बूंदी शहर की बेटी डॉ दीक्षा भारद्वाज
कोटा। राजस्थान के बूंदी शहर की प्रतिभाशाली डॉ. दीक्षा भारद्वाज ने अपनी उपलब्धियों में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जोड़ते हुए दूसरी बार मानद डॉक्टरेट (Honorary Doctorate) की उपाधि प्राप्त की। जयपुर में आयोजित भव्य समारोह में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता रज़ा मुराद द्वारा उन्हें Anchoring Category में इस प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित किया गया। राजेंद्र सिंह हाड़ा के अनुसार यह डॉ. दीक्षा भारद्वाज के लिए दूसरा बड़ा डॉक्टरेट सम्मान है। इससे पूर्व दिल्ली में भी उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत सफर की सफलता है, बल्कि बुंदी शहर के लिए भी गौरव का विषय है।
पेशे से Anchor एवं Emcee, डॉ. दीक्षा भारद्वाज ने अपनी प्रभावशाली मंचीय शैली, आत्मविश्वास और बहुमुखी प्रतिभा के दम पर मनोरंजन जगत में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। वह कई बॉलीवुड कलाकारों के साथ मंच साझा कर चुकी हैं और विभिन्न प्रतिष्ठित आयोजनों में अपनी एंकरिंग का हुनर प्रस्तुत कर चुकी हैं।
उनकी उपलब्धियों की फेहरिस्त भी बेहद खास है। जयपुर में बॉलीवुड अभिनेता वरुण सूरी (Pyaar Ka Punchnama) एवं बॉलीवुड अभिनेता जुनैद हुसैन खान से उन्हें Best Anchor of the Year Award प्राप्त हो चुका है। वहीं खामसी में बॉलीवुड अभिनेत्री इशिता गांगुली द्वारा उन्हें Celebrity Anchor Award तथा चित्तौड़गढ़ में बॉलीवुड अभिनेत्री नीलू वाघेला जी द्वारा Iconic Celebrity Anchor Award से नवाज़ा जा चुका है। अपने इस गौरवपूर्ण सफर का श्रेय डॉ. दीक्षा भारद्वाज अपने गुरु संत डॉ गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसा के मार्गदर्शन को देती हैं। उनका मानना है कि गुरु के मार्गदर्शन, प्रेरणा और सकारात्मक सोच ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ने का संबल दिया और बड़े सपनों को साकार करने की दिशा दिखाई।
वहीं, वह अपने माता-पिता के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करती हैं, जिन्होंने बचपन से ही उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने, अपनी प्रतिभाओं को निखारने और बहुमुखी व्यक्तित्व विकसित करने के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया। डॉ. दीक्षा भारद्वाज की कहानी इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण है कि प्रतिभा जब मेहनत, सही मार्गदर्शन और माता-पिता के आशीर्वाद से मिलती है, तो सपने केवल सपने नहीं रहते—वे इतिहास बन जाते हैं। एम एस जी डेरा सच्चा सौदा व मानवता भलाई केन्द्र कोटा की सेवादार एवं बूंदी की बेटी से लेकर बॉलीवुड के मंच तक—डॉ. दीक्षा भारद्वाज का यह सफर वाकई “हौसलों से ऊंची उड़ान” की कहानी है।