Saharanpur Collectorate Mosque: सहारनपुर कलेक्ट्रेट के अंदर बनी मस्जिद पर प्रशासन का बड़ा एक्शन
जिला अदालत के फैसले के बाद ध्वस्तीकरण कार्रवाई, भारी पुलिस बल तैनात
Saharanpur Collectorate Mosque: सहारनपुर (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर स्थित एक मस्जिद को प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, यह निर्माण सरकारी भूमि पर अवैध रूप से किया गया था। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई जिला अदालत द्वारा निचली अदालत के बेदखली आदेश को बरकरार रखने के बाद की गई। प्रशासन ने कार्रवाई के दौरान छह बुलडोजरों का इस्तेमाल किया और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा। अधिकारियों ने कहा कि पूरी प्रक्रिया न्यायिक आदेश और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
डीआईजी अभिषेक सिंह के अनुसार, कलेक्ट्रेट परिसर में सरकारी जमीन पर एक निर्माण को लेकर सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने आदेश जारी किया था। मस्जिद कमेटी ने इस आदेश के खिलाफ पहली अपील की थी, लेकिन अपील खारिज होने के बाद मूल आदेश को बरकरार रखा गया। पुलिस अधिकारी ने कहा कि प्रशासन की ओर से आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गई हैं और इसी प्रक्रिया के तहत निर्माण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। ध्वस्तीकरण के दौरान किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए क्षेत्र में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई। अधिकारियों के मुताबिक, त्योहारों और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त पीएसी तथा आरएएफ बल भी उपलब्ध कराया गया था।
सांसद इकरा हसन को नजरबंद किए जाने का दावा
मामले को लेकर कैराना की सांसद इकरा हसन के सहारनपुर जाने की चर्चा के बीच पुलिस द्वारा उन्हें नजरबंद किए जाने की जानकारी सामने आई। वह कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद से जुड़े घटनाक्रम के मद्देनजर सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं। उनकी मां और पूर्व सांसद तबस्सुम हसन ने प्रशासन की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और कहा कि उनका परिवार जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध है।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ध्वस्तीकरण पर सवाल उठाते हुए इसे केवल मस्जिद का मुद्दा नहीं बताया। उन्होंने जमीन के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े दावों का उल्लेख किया। मसूद का कहना है कि संबंधित जमीन के रिकॉर्ड और उसके पुराने स्वामित्व को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि मस्जिद वक्फ बोर्ड के साथ पंजीकृत थी और कार्रवाई में वक्फ बोर्ड को पक्षकार नहीं बनाया गया। उन्होंने 'वक्फ बाय यूजर' का उल्लेख करते हुए कहा कि लंबे समय से वहां नमाज और धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं।
प्रशासन और विपक्ष के दावों में अंतर
इस पूरे मामले में प्रशासन का पक्ष है कि निर्माण सरकारी भूमि पर अवैध रूप से किया गया था और अदालत के आदेश के बाद उसे हटाया गया। वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भूमि रिकॉर्ड और वक्फ से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाए हैं। मामले को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है। इसलिए जमीन के रिकॉर्ड, न्यायिक आदेश और संबंधित दस्तावेजों की पूरी स्थिति ही विवाद से जुड़े कानूनी पहलुओं को स्पष्ट कर सकती है।