तहेरे भाई की हत्या में आरोपी को आजीवन कारावास की सजा
गांव इस्सापुर खुरगान में 15 वर्ष पूर्व पिता-पुत्र ने दीवार में बनी मोरी के विवाद में युवक की गोली मारकर कर दी थी हत्या
कैराना (सच कहूँ न्यूज़)। Kairana News: अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवीन कुमार ने 15 वर्ष पुराने तहेरे भाई की हत्या के मामले में एक हत्यारोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतने के आदेश दिए है। एक अन्य हत्यारोपी की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी।
जिला शासकीय अधिवक्ता संजय चौहान(अपराध), सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजय कुमार पुनिया तथा वादी के अधिवक्ता होईलाल एडवोकेट व योगेश मलिक एडवोकेट ने बताया कि विगत 31 अगस्त 2011 को यमुना खादर क्षेत्र के गांव इस्सापुर खुरगान निवासी सुरेश ने कोतवाली कैराना पर अभियोग पंजीकृत कराया था। मुकदमें में बताया था कि उसके चाचा लीलू ने अपने मकान की दीवार में एक मोरी बना रखी थी, जिसमें से उनके घर की सारी चीजें उन्हें दिखाई देती थी। उन्होंने अपने चाचा को कई बार दीवार की उस मोरी को बंद करने को कहा, लेकिन उसने कोई सुनवाई नही की। इसके बाद, उसने स्वयं ही वह मोरी बंद कर दी। परन्तु, चाचा लीलू व उसके परिवार के लोगो ने दीवार में बनी मोरी को फिर से खोल दिया। इसी बात को लेकर उनके साथ में कहासुनी हो गई।
इसी विवाद में 31 अगस्त 2011 की शाम करीब सवा चार बजे लीलू व उसका पुत्र देवीसिंह उसके भाई राजेश को अपने घर में ले गए। जहां पर लीलू ने उसके भाई को पीछे से पकड़ लिया, जबकि उसके पुत्र देवीसिंह ने तमंचे से उसे गोली मार दी। वह अपने भाई को घायल अवस्था में उपचार के लिए चिकित्सक के पास लेकर गए। जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके दोनों हत्यारोपी पिता-पुत्रों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। हत्यारोपी देवीसिंह को प्रतिवादी पक्ष की पैरवी पर किशोर न्यायालय ने नाबालिग करार दे दिया। न्यायालय के इस निर्णय को वादी पक्ष की ओर से उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। उच्च न्यायालय ने भी किशोर न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा। इसके पश्चात, उच्च न्यायालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। जहां पर उच्चतम न्यायालय ने आरोपी देवीसिंह को बालिग करार दिया।
मामले में हत्यारोपी लीलू की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी। मामले में विवेचक ने आरोप-पत्र तैयार करके न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाह न्यायालय के समक्ष पेश किए गए। यह मामला कैराना स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नवीन कुमार के न्यायालय में विचाराधीन था। सोमवार को न्यायाधीश ने पत्रावलियों के अवलोकन व दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं के तर्क-वितर्क सुनने के पश्चात आरोपी देवीसिंह को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व बीस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोषी को अर्थदंड अदा न करने पर एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास भुगतने के आदेश दिए है।