Muzaffarnagar Riots Case: मुजफ्फरनगर दंगा केस में 22 नेताओं को बड़ी राहत, सरकार के आदेश पर वापस हुआ मुकदमा

Muzaffarnagar Riots Case: मुजफ्फरनगर दंगा केस में 22 नेताओं को बड़ी राहत, सरकार के आदेश पर वापस हुआ मुकदमा

Published On

Muzaffarnagar Riots Case: मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 2013 के सांप्रदायिक दंगों से जुड़े एक मामले में कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं को बड़ी राहत मिली है। सरकार के आदेश के बाद विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने नंगला मंदौड़ पंचायत से जुड़े मामले को वापस लेने का आदेश दिया है। इस मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, यूपी मंत्री कपिल देव अग्रवाल, सपा सांसद हरेंद्र मलिक और पूर्व मंत्री सुरेश राणा समेत कई नेता आरोपी बनाए गए थे।

हालांकि, अलग-अलग रिपोर्टों में आरोपियों की संख्या 22 और 25 बताई गई है। इसलिए मामले में शामिल आरोपियों की अंतिम संख्या को लेकर आधिकारिक न्यायिक आदेश का संदर्भ महत्वपूर्ण है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर के नंगला मंदौड़ में आयोजित एक पंचायत से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार पंचायत के दौरान सरकारी आदेशों के उल्लंघन, रास्ता रोकने और सरकारी काम में बाधा डालने समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।

मामले में कई राजनीतिक नेताओं और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाद में पुलिस ने जांच के आधार पर आरोपपत्र दाखिल किया और मामला विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट में पहुंचा।

इन नेताओं के नाम थे शामिल

मामले में भाजपा और सपा से जुड़े नेताओं के नाम सामने आए थे। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, यूपी सरकार में मंत्री कपिल देव अग्रवाल, पूर्व मंत्री सुरेश राणा और सपा सांसद हरेंद्र मलिक प्रमुख नाम हैं।

यह मामला 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के व्यापक घटनाक्रम से जुड़ा हुआ था। इसी मामले में जनवरी 2025 में विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने कई आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। उस समय संजीव बालियान, कपिल देव अग्रवाल और अन्य नेताओं के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ा था।

जनवरी 2025 में तय हुए थे आरोप

जनवरी 2025 में विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने मामले में 19 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए थे। इनमें संजीव बालियान, कपिल देव अग्रवाल, सुरेश राणा के अलावा साध्वी प्राची और स्वामी यति नरसिंहानंद समेत अन्य आरोपी शामिल थे।

उस समय आरोपियों पर पंचायत के दौरान भड़काऊ भाषण देने और निषेधाज्ञा के उल्लंघन से जुड़े आरोपों को लेकर कार्रवाई चल रही थी।

अब सरकार के आदेश पर वापस हुआ केस

अब अगस्त 2026 में सरकार के आदेश के बाद विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने मामले को वापस लेने का आदेश जारी किया है। इसके बाद मामले में आरोपी बनाए गए नेताओं को बड़ी राहत मिली है। इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि मामले में अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं के नाम शामिल थे।

2013 के मुजफ्फरनगर दंगे क्यों रहे थे सुर्खियों में?

मुजफ्फरनगर और आसपास के क्षेत्रों में 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगों ने पूरे देश का ध्यान खींचा था। इन घटनाओं में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और हजारों लोग विस्थापित हुए थे। बाद में दंगों से जुड़े कई मामलों में अलग-अलग अदालतों में सुनवाई हुई। नंगला मंदौड़ पंचायत से  जुड़ा यह मुकदमा भी उसी दौर की घटनाओं से संबंधित मामलों में शामिल रहा है।

नेताओं को मिली बड़ी राहत

सरकार के आदेश के बाद विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट द्वारा केस वापस लिए जाने से संजीव बालियान, कपिल देव अग्रवाल, हरेंद्र मलिक, सुरेश राणा समेत मामले में शामिल अन्य आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, मामले में आरोपियों की संख्या को लेकर विभिन्न रिपोर्टों में अंतर है, इसलिए अंतिम स्थिति अदालत के आदेश से ही स्पष्ट मानी जानी चाहिए।

About The Author

Related Posts