हस्तशिल्प निर्यात को एक अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य, युवा उद्यमियों को मिलेगा बढ़ावा:गिरिराज सिंह 

आईएचजीएफ दिल्ली मेला-ऑटम 2026 का  हुआ भव्य शुभारंभ

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ग्रेटर नोएडा (सच कहूँ न्यूज़ )। ग्रेटर नॉएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में मंगलवार को 62 वें आईएचजीएफ दिल्ली मेला-ऑटम 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ। केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने मेले का उद्घाटन करते हुए भारतीय हस्तशिल्प के निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने, नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तलाश करने और युवा प्रतिभाओं को उद्योग से जोड़ने पर जोर दिया।

उन्होंने हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) और उद्योग से सामूहिक प्रयासों के जरिए एक अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य हासिल करने का आह्वान किया। इस अवसर पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भी मौजूद रहे। 13 से 17 अक्टूबर तक आयोजित इस पांच दिवसीय मेले में होम, लाइफस्टाइल, फैशन, फर्निशिंग, फर्नीचर और इंटीरियर उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला प्रदर्शित की जा रही है। आयोजन में 17 समर्पित हॉलों में 3000 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा इंडिया एक्सपो सेंटर के विभिन्न स्तरों पर स्थित प्रमुख निर्यातकों के करीब 900 स्थायी शोरूम भी खरीदारों के लिए उपलब्ध हैं। मेले के पहले दिन अमेरिका और यूरोप सहित भारत के प्रमुख निर्यात बाजारों से बड़ी संख्या में विदेशी खरीदार पहुंचे। इससे भारतीय हस्तशिल्प और घरेलू सजावट से जुड़े उत्पादों के लिए नए कारोबारी अवसर बनने की उम्मीद है।

नए बाजारों और युवा निर्यातकों पर जोर

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली मेला भारतीय निर्माताओं और निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से जोड़ने का महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इसकी बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच भारतीय हस्तशिल्प उद्योग की प्रगति को दर्शाती है। उन्होंने निर्यातकों से पारंपरिक बाजारों तक सीमित रहने के बजाय उभरते और विशिष्ट बाजारों में भी अपनी मजबूत उपस्थिति बनाने की अपील की। उन्होंने पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों की भागीदारी कम से कम 10 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास करने पर जोर दिया। साथ ही युवा उद्यमियों को अनुभवी निर्यातकों से सीखने और हस्तशिल्प, डिजाइन तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नए अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि उद्योग को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए मौजूदा क्राफ्ट क्लस्टरों का विकास, नए क्लस्टरों की स्थापना और हथकरघा, हस्तशिल्प व टेक्सटाइल क्षमताओं की जिलावार मैपिंग जरूरी है। उद्यमियों को नए बाजारों तक पहुंचाने और उनके उत्पादों की पहचान बढ़ाने के लिए फैसिलिटेशन सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता भी बताई।

100 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है वैश्विक गिफ्ट बाजार:गिरिराज सिंह

मंत्री गिरिराज सिंह ने वैश्विक गिफ्ट और डेकोर बाजार की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में भारतीय उत्पादों के लिए व्यापक अवसर मौजूद हैं।कहा कि 100 अरब डॉलर तक ये वैश्विक गिफ्ट बाजार पहुंच सकता है। उन्होंने पारंपरिक कलाओं, कुशल कारीगरों और रचनात्मक डिजाइन के दम पर वैश्विक बाजार में भारत की मजबूत पहचान बनाने पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी इस्तेमाल कर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हस्तशिल्प की पहुंच बढ़ाने की भी बात कही। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने ईयूडीआर अनुपालन एप्लिकेशन भी लॉन्च किया। ईपीसीएच की इस पहल का उद्देश्य लकड़ी और लकड़ी से बने उत्पादों की वैध सोर्सिंग तथा उनकी आपूर्ति शृंखला की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करना है। इससे लकड़ी की उत्पत्ति, परिवहन और आपूर्ति से जुड़ी जानकारी को ट्रैक करने तथा कारोबार में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

परंपरागत शिल्प और कारीगरों की विरासत को मिलेगा बढ़ावा:पबित्रा मार्गेरिटा

केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री एवं कपड़ा राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने कहा कि आईएचजीएफ दिल्ली मेला एक हॉल से शुरू होकर आज लगभग 3000 प्रदर्शकों को एक मंच पर लाने वाला बड़ा आयोजन बन गया है। यह केवल व्यापार और आर्थिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही भारतीय शिल्पकला और पारंपरिक कौशल के संरक्षण का भी महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने वैश्विक बाजारों में भारतीय हस्तशिल्प को पहुंचाने के लिए प्रदर्शकों के प्रयासों की सराहना की। कहा कि परंपरागत शिल्प और कारीगरों की विरासत को   बढ़ावा मिलेगा। ईपीसीएच के अध्यक्ष डॉ. नीरज खन्ना ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि मेले का प्रत्येक संस्करण नए कारोबारी अवसर पैदा करता है और खरीदारों के साथ संबंध मजबूत करता है। परिषद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय हस्तशिल्प और वस्त्रों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में प्रमुख यूरोपीय मेलों में भागीदारी और विदेशी खरीदारों से संपर्क बढ़ाने का सकारात्मक परिणाम इस संस्करण में देखने को मिल रहा है।

स्टॉल शुल्क घटाने से पंजीकरण में 22 प्रतिशत वृद्धि

ईपीसीएच के महानिदेशक की भूमिका में मुख्य संरक्षक एवं इंडिया एक्सपोजिशन मार्ट लिमिटेड (आईईएमएल) के अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार ने हस्तशिल्प उद्योग में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), ग्रामीण कारीगरों और पारंपरिक शिल्प की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि स्टॉल लगाने का न्यूनतम शुल्क 8500 रुपये से घटाकर 2500 रुपये करने से प्रदर्शकों के पंजीकरण में 22 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस बचत का इस्तेमाल प्रदर्शक खरीदारों की मेहमाननवाजी, उत्पादों की गुणवत्ता और डिस्प्ले डिजाइन बेहतर बनाने में कर सकते हैं।

बाजार के अनुरूप डिजाइन किए गए उत्पाद:सागर मेहता

ईपीसीएच के उपाध्यक्ष सागर मेहता ने कहा कि प्रदर्शकों ने बदलते वैश्विक बाजार और खरीदारों की पसंद के अनुरूप उत्पादों के डिजाइन और विकास पर काम किया है। वहीं, मेला स्वागत समिति के अध्यक्ष अवधेश अग्रवाल ने बताया कि इस संस्करण में उत्पादों की विविधता, खरीदार-विक्रेता संवाद और डिजाइन आधारित मूल्यवर्धित उत्पादों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

100 से अधिक देशों के खरीदारों के आने की उम्मीद

स्वागत समिति के उपाध्यक्ष प्रदीप मुछाला, प्रियेश भंडारी, राजेश कुमार जैन, सलमान आजम और आरबी लाहोटी ने भी मेले में विदेशी खरीदारों, बाइंग हाउस, एजेंटों तथा घरेलू थोक खरीदारों की भागीदारी को उत्साहजनक बताया। आयोजकों को उम्मीद है कि इस संस्करण में 100 से अधिक देशों के खरीदार पहुंचेंगे। मेले के दौरान वैश्विक खरीदारों के रुझान, उत्पादन एवं सोर्सिंग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की दृश्यता, ईयूडीआर अनुपालन, यूरोपीय पैकेजिंग नियमों और भारत के मुक्त व्यापार समझौतों जैसे विषयों पर ज्ञान सत्र भी आयोजित किए जाएंगे।

निर्यातकों को नए कारोबारी अवसर उपलब्ध होंगे:राजेश रावत

ईपीसीएच के कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने कहा कि मेले का उद्देश्य निर्यातकों को नए कारोबारी अवसर उपलब्ध कराने, उत्पादों की विविधता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ मजबूत संबंध स्थापित करने में मदद करना है। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत से हस्तशिल्प का कुल निर्यात 33,168 करोड़ रुपये यानी 3,754 मिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। परिषद का प्रयास है कि भारतीय हस्तशिल्प को विश्व बाजार में उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के विश्वसनीय स्रोत के रूप में स्थापित किया जाए। उद्घाटन समारोह में ईपीसीएच और आईईएमएल के पदाधिकारियों, विदेशी खरीदारों, भारतीय खरीद एजेंटों तथा प्रमुख सदस्य निर्यातकों सहित बड़ी संख्या में उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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